साहित्य, समाज और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरोने वाले डॉ. दयाराम आलोक द्वारा संकल्पित 'आध्यात्मिक दान अनुष्ठान' के अंतर्गत देश के 150+ मंदिर, मुक्तिधाम, गौशाला एवं विद्यालयों में सीमेंट बेंच एवं नकद सेवा अर्पित की गई है। उसी पावन श्रृंखला में प्रस्तुत है, इस स्थल पर किए गए सेवा-समर्पण का वृत्तांत।
श्री पशुपति नाथ मन्दिर जूना ढलमु जिला मंदसौर हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
बैंच व्यवस्था
: सेवा ही शिवत्व है
चम्बल की गोद में, शांति का ठौर
मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के अंतर्गत, ग्राम जूना ढलमु की पावन धरा पर, चम्बल नदी की गोद में विराजमान है - चमत्कारिक श्री पशुपति नाथ महादेव का मंदिर। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, शांति और लोक-कल्याण का संगम है। बरसात में जब चम्बल का आँचल चारों ओर जल से भर जाता है, तब भी यह मंदिर अपने विशाल परिसर, हरे-भरे वृक्षों और दिव्य वातावरण के साथ भक्तों को परम शांति प्रदान करता है।
ऐसे पावन धाम में भक्तों की सुविधा हेतु छोटा-सा प्रयास भी महापुण्य बन जाता है।
इसी भावना से प्रेरित होकर मंदिर समिति के संरक्षक श्री जगदीशचंद्र जी पाटीदार और प्रबंधन प्रमुख श्री भागीरथ जी के अनुरोध पर, तथा मुख्य पुजारी श्री भोनीराम जी पाटीदार के सान्निध्य में, एक जन-सुविधा का कार्य संपन्न हुआ।
दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा एक विनम्र समर्पण
सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन को समाज-सेवा में समर्पित करने के संकल्प के अंतर्गत, साहित्य मनीषी एवं समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ की ओर से - इस मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने हेतु ३ सीमेंट बेंचों तथा १५००/- रुपये की सहयोग राशि का दान दिनांक 10 मार्च 2023 को सादर समर्पित किया गया।
यह दान केवल बेंचों का दान नहीं, बल्कि वृद्धजनों, यात्रियों और दर्शनार्थियों को विश्राम का एक स्वच्छ, स्थायी और सम्मानजनक स्थान प्रदान करने का प्रयास है।
मंदिर समिति ने इस सेवा भावना का सम्मान करते हुए दानदाता का समारोहपूर्वक अभिनंदन किया और मंदिर परिसर में दान पट्टिका (दिनांक 04/03/2023) स्थापित की, ताकि यह सत्कार्य अन्य समर्थ जनों के लिए भी प्रेरणा-स्रोत बने।
काव्यात्मक छंद
छंद 1 चम्बल की गोद में विराजे, पशुपति नाथ महान। ढलमु ग्राम का गौरव मंदिर, भक्तों का कल्याण।। जगदीशचंद्र जी संरक्षक, सेवा में तत्पर सदा। दान पट्ट अंकित हुआ, समाजसेवा का ध्वजा।।
छंद 2 भागीरथ जी प्रबंधन प्रमुख, मंदिर की शोभा बढ़ाएँ। व्यवस्था की नींव मजबूत कर, श्रद्धा दीप जलाएँ।। भोनीराम जी पुजारी, पूजा में रत हर क्षण। भक्तों को आशीष प्रदान कर, करते मंगल वंदन।।
छंद 3 डॉ. दयाराम आलोक ने, दान दिया अनुपम। तीन सिमेन्ट बेंच और राशि, किया जनहित समर्पण।। समाजसेवा का दीप प्रज्वलित, मंदिर में छाया प्रकाश। दान पट्ट अंकित हुआ, श्रद्धा का अद्भुत आभास।।
छंद 4 ढलमु जूना की धरती पर, सेवा का अद्भुत गान। गौशालाएँ, मुक्ति धाम, मंदिर सबका कल्याण।। दानदाता का सम्मान हुआ, समिति ने आभार जताया। सामाजिक चेतना का दीप, जन-जन में जगमगाया।।
श्लोक
पशुपतिनाथाय नमः सर्वलोकहिताय च। दानं यः समर्पयति, स पुण्यफलमश्नुते।।
चम्बल तट पर मंदिर महान, पशुपतिनाथ का पावन स्थान। बरखा में जल जब चारों ओर, भक्तों को मिलता शांति का ठौर। डॉ. आलोक का दान अनूप, बेंचें बनीं सेवा स्वरूप। समर्पण से जन-सेवा का पथ, दान पट्टिका बने प्रेरणा-स्मृत।
चम्बल तट पर मंदिर महान, पशुपतिनाथ का पावन स्थान। बरखा में जल जब चारों ओर, भक्तों को मिलता शांति का ठौर। डॉ. आलोक का दान अनूप, बेंचें बनीं सेवा स्वरूप। समर्पण से जन-सेवा का पथ, दान पट्टिका बने प्रेरणा-स्मृत।
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान- पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।




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