दूधाखेड़ी माताजी मंदिर घसोई, जिला मंदसौर - दामोदर पथरी हॉस्पिटल शामगढ़ द्वारा 4 सीमेंट बेंच व्यवस्था
1. ओपनिंग हुक - पहले 15 सेकंड
क्या आपने कभी सुना है, जहाँ दवा हार जाती है, वहाँ माँ की शरण काम आ जाती है?
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक ऐसा ही धाम है - माँ दूधाखेड़ी, घसोई।
जहाँ लकवे से पीड़ित लोग आते हैं श्रद्धा लेकर... और लौटते हैं नई उम्मीद लेकर।
और आज इस पावन धाम में एक और सेवा जुड़ गई है - बैठने के लिए 4 सीमेंट बेंचों की व्यवस्था।
2. भूमिका - मंदिर का परिचय
नमस्कार, जय माता दी।
आज हम आपको ले चल रहे हैं सुवासरा तहसील से मात्र 7 किलोमीटर दूर, घसोई ग्राम में स्थित श्री दूधाखेड़ी माताजी मंदिर में।
माँ दूधाखेड़ी को माता पार्वती के रूप में पूजा जाता है। इन्हें विशेष रूप से लकवाग्रस्त रोगियों की आराध्या माना जाता है।
नवरात्रि के दिनों में यहाँ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। मंदिर की प्रतिमा की अलौकिक आभा देखते ही मन को शांति मिल जाती है।
मंदिर सड़क के समीप ही स्थित है, इसलिए सुवासरा से बस द्वारा यहाँ पहुँचना बहुत आसान है।
3. मुख्य तथ्य - दान की कथा
आज के युग में जब प्रकृति से दूरी बढ़ गई है, खान-पान में कुरीतियाँ आ गई हैं, रक्तचाप और लकवा जैसी बीमारियाँ घर-घर में दस्तक दे रही हैं... तब ऐसे श्रद्धा स्थलों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इसी भावना को समझते हुए, समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक जी ने एक अनुपम आध्यात्मिक अनुष्ठान अपनाया है।
वे सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और अपनी पेंशन की राशि से, साथ ही अपने ब्लॉग और यूट्यूब से प्राप्त राशि से, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों, मुक्तिधाम और गौशालाओं में सीमेंट बेंचें और निर्माण हेतु नकद दान करते आ रहे हैं।
अब तक 151 से अधिक संस्थानों में यह सेवा पहुँच चुकी है।
इसी श्रृंखला में, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से, डॉ. आलोक जी के पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर द्वारा दूधाखेड़ी माताजी मंदिर घसोई के आँगन में 4 सीमेंट बेंचें भेंट की गईं।
ये बेंचें चद्दर के शेड में सजाई गई हैं, ताकि दूर-दूर से आने वाले भक्तजन आराम से बैठ सकें, विश्राम कर सकें।
4. समिति और सम्मान
मंदिर समिति के प्रमुख दशरथ जैन जी के नेतृत्व में मंदिर का वातावरण पावन और सुंदर बना हुआ है। भक्तों की सेवा में समिति सदैव तत्पर रहती है।
दान के उपलक्ष्य में समिति ने दानदाता का स्वागत-सम्मान किया और आभार व्यक्त किया।
लोगों को प्रेरणा मिले, इस उद्देश्य से मंदिर में दान का शिलालेख / दान पट्टिका भी लगवाई गई।
5. समापन हुक - दर्शकों से जुड़ाव
सेवा ही सच्ची पूजा है।
एक बेंच... किसी थके हुए भक्त के लिए विश्राम बन जाती है।
किसी रोगी के परिजन के लिए सहारा बन जाती है।
अगर यह सेवा आपको प्रेरणा देती है, तो इस वीडियो को शेयर जरूर करें, ताकि और लोग भी इस दान-पथ से जुड़ सकें।
बोलिए दूधाखेड़ी माता की जय!
दूधाखेडी माताजी मंदिर घसोई , जिला मंदसौर ,मध्य प्रदेश में
दामोदर पथरी हॉस्पिटल शामगढ़ द्वारा
सीमेंट बैंच व्यवस्था
माँ दूधाखेड़ी घसोई : भक्तों का श्रद्धा स्थान
आज के युग में प्रकृति से दूरी,
खान-पान में आई है कुरीति भारी।
रक्तचाप बढ़े, लकवा घेरे,
जीवन हो जाए दुख का डेरे।
माँ दूधाखेड़ी की शरण में आते, घसोई मंदिर में रोगी जाते। कुछ ही दिनों में चमत्कार दिखे, शरीर में नवजीवन की किरणें झलके। समिति प्रमुख दशरथ जैन, करते हैं व्यवस्था का संधान। भक्तों की सेवा में तत्पर, मंदिर का वातावरण पावन और सुंदर। समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक महान, दान की परंपरा जिनकी अनुपम पहचान। दामोदर पथरी अस्पताल से, चार सीमेंट बेंचें भेंट कीं मंदिर के आँगन में। चद्दर के शेड में सजी हुईं, भक्तजन सुविधा से बैठें वहीं। सड़क के समीप मंदिर खड़ा, सुवासरा से बस मिले बड़ा सहारा। समिति ने आभार जताया, दानदाता का सम्मान बढ़ाया। माँ दूधाखेड़ी घसोई धाम, भक्तों का श्रद्धा स्थल, जीवन का आराम।
घसोई ग्राम में स्थित दूधाखेड़ी माता का मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो सुवासरा तहसील मुख्यालय से ७ किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर की प्रतिमा अलौकिक आभा से भरी हुई है, और नवरात्री पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के अनेकों मंदिरों को दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने के अपने आध्यात्मिक अनुष्ठान के तहत समाज सेवी डॉ. दयाराम आलोकजी ने इस धार्मिक स्थल को दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से 4 सिमेन्ट की बेंचें समर्पित की हैं|
मंदिर समिति के सदस्यों और ग्राम जन ने दान दाता का स्वागत सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया |लोगों को प्रेरणा देने के उद्देश्य से दान का शिलालेख मंदिर मे लगाया गया|
बोलिए दूधा खेड़ी माता की जय
Video Doodhakhedi Temple Ghasoi
समाजसेवी
आद्यात्मिक दान-पथ
साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी पेंशन की राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube चैनल से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -




