6.6.26

हनुमान मंदिर ढलमु मगरा :भक्ति का दीप :आस्था का समंदर :Aalok bench donation

 हनुमान मंदिर ढलमु मगरा 

✨ काव्यात्मक विवरण

ढलमु मगरा ग्राम का हनुमान मंदिर, भक्ति का दीप, आस्था का समंदर। भव्य प्रतिमा में पवनपुत्र विराजे, माँ चम्बल की धारा निकट सजाजे।

रंग-रोगन से मंदिर दमक रहा, श्रद्धा का दीपक हर मन में जग रहा। समिति प्रमुख श्री कमलेश जी विश्वकर्मा, सेवा में अग्रणी, मंदिर का धर्मा।

समर्पण से जुड़े जगदीश जी पाटीदार, भक्ति-पथ पर चलते, दान में अपार। डॉ. आलोक ने बेंचें भेंट कीं, भक्तों की सुविधा हेतु निधि दीं।

दान पट्टिका मंदिर में स्थापित हुई, प्रेरणा की ज्योति समाज में जगी। जय-जयकार गूँजे हर द्वार, “बोलिए पवनपुत्र हनुमान की जयकार!”


श्लोक-

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर। ढलमु मगरा मंदिर में विराजे, भक्तों के संकट हरि कर साजे।

पवनपुत्राय वीराय भक्तानां सुखदायिने।

ढल्मु मग्रामध्ये नित्यं हनुमते नमः॥

दानधर्मे प्रतिष्ठायै कमलेश-जगदीशकौ।

आलोकस्य महादाने जयतु भक्तिसंविधिः॥

मंदसौर जिले मे गरोठ तहसील का ग्राम  ढलमु मगरा

यहाँ का हनुमान मंदिर ग्रामीण जन की आस्था का केंद्र है। 

हनुमान जी की भव्य प्रतिमा बहुत सुन्दर और आकर्षक है। 

मंदिर का रंग रोगन आकर्षक है । 

माँ चम्बल निकट बह रही है। 

मंदिर प्रबंधन  समिति के प्रमुख हैं श्री कमलेश जी विश्वकर्मा

डॉ . आलोक ने भक्तों की सुविधा के लिए cement  बेंचें   भेंट की  और मंदिर विकास हेतु 1500/-नकद दिए ।  

समिति ने अन्य समर्थ लोगों को  दान के लिए प्रेरित करने की मंशा से  दान  दाता की दान पट्टिका  मंदिर मे स्थापित की 

बोलिए पवन पुत्र हनुमान की जय !

 मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी
  डॉ. दयाराम आलोक 
                        

     


                                      
                                  


शामगढ़ का

आध्यात्मिक  दान-अनुष्ठान

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 हनुमान  मन्दिर ढल्मु मगरा


३ सीमेंट की बेंच+ १५००/- नकद दान 

हनुमान मन्दिर ढलमु मगरा  के पिलर पर शिलालेख 



कमलेश जी के खाते में मन्दिर हेतु १५००/- पेमेंट किये २४/४/२०२३ 




मन्दिर के प्रमुख कार्यकर्ता -

कमलेश जी विश्वकर्मा ९४०७१-१८४८३ 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा हनुमान मंदिर ढलमु मगरा   हेतु  सिमेन्ट बेंच व नकद  दान सम्पन्न 

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