6.6.26

मिश्रोली मुक्तिधाम में जनसेवा का उदाहरण: डॉ. दयाराम आलोक का बेंच दान

 

 काव्यात्मक छंद

छंद 1

मिश्रोली ग्राम का धाम निराला, टाइलों से सुसज्जित उजियाला। हरियाली से शीतलता पाता, श्रद्धा से जन-मन पुलकित होता।

छंद 2

बरामदा विशाल बना यहाँ, श्रद्धांजलि का स्थल कहा। ग्राम पंचायत रखती ध्यान, जगमाल सिंह सरपंच महान।

छंद 3

सात बेंचें दान में आईं, दयाराम आलोक ने भेंट चढ़ाई। दान पट्टिका स्तंभ सजाए, प्रेरणा से जन-मन जगाए।

छंद 4

सेवानिवृत्ति का संकल्प महान, पेंशन समर्पित जनकल्याण। मंदिर, गौशाला, मुक्तिधाम, दान-पथ से जगमग धाम।

संस्कृत श्लोक

श्लोक 1

ग्रामे मिश्रोली नाम्नि मुक्तिधामं सुशोभितम्। टाइलैः सज्जितं रम्यं वृक्षैः शीतलमण्डितम्॥

श्लोक 2

दानेन सप्त बञ्चीनां दयारामेन कल्पितम्। श्रद्धांजलिप्रदं स्थानं जनसेवाय समर्पितम्॥

श्लोक 3

पेंशनं समर्प्य स्वीयं जनकल्याणकारणम्। आलोकस्य महादानं प्रेरणायै सदा भवेत्॥



राजस्थान के झालावाड़ जिले का एक गाँव मिश्रोली 

यहाँ के मुक्तिधाम  के परिसर मे टाइल्स लगी हुई हैं 

और आगंतुकों  के लिए गर्मी मे शीतलता  प्रदान करने के लिए पेड़ पौधे शोभित हैं। 

बरसात से बचाव और मृत आत्मा को श्रद्धांजलि  के लिए बडा  बरामदा  निर्मित है। 

मुक्तिधाम का रख रखाव  ग्राम पंचायत  के अधीन है। 

यहाँ के सरपंच जगमाल सिंग जी हैं। 

दागियों के लिए बैठक सुविधा सृजन करने के लिए समाजसेवी  डॉ . दयाराम जी आलोक ने इस मुक्तिधाम को 7 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की हैं। 

सरपंच साहब ने इस दान को यादगार बनाने के लिए दान दाता की  दान पट्टिका  बरामदे  के पिलर पर स्थापित कर दी है ताकि अन्य समर्थ लोगों को  दान की प्रेरणा मिलती रहेगी। 

दान के लिए सम्मान और  आभार व्यक्त किया गया । 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयारा
म आलोक




शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा:
उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।





मिश्रोली के मुक्ति धाम को

21 हजार रु. की 7 बेंच भेंट .


मुक्तिधाम मे बेंच लगाई गईं.



 
 
मिश्रोली के सरपंच साहेब जगमाल सिंग जी की अनुमति से दान सम्पन्न । 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656  s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 शामगढ़ द्वारा दान सम्पन्न

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