आस्था और अंधविश्वास के बीच बेहद महीन रेखा होती है, पता ही नहीं चलता कि कब आस्था अंधविश्वास में तब्दील हो गई. विज्ञान, वकील ,डॉक्टर की डिग्री होने के बावजूद ऐसे कई लोग गले मे काला डोरा या ताबीज धारण करते हैं और राशिफल,कुंडली के चक्कर से बाहर नहीं निकल पाते हैं -Dr.Dayaram Aalok,M.A.,Ayurved Ratna,D.I.Hom(London)
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गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़नई चेतना का उज्ज्वल धाम,
जहाँ आचार्य श्रीराम शर्मा के
युग-परिवर्तनकारी विचारों की गूँज
संस्कारों के बीज बोती है आम जनमानस में।
यहाँ मंदिर प्रांगण में राशि-नक्षत्रों संग
नयनाभिराम वृक्ष-पौधे झूमते हैं,
भंडारे की सुगंध गुरु पूर्णिमा पर
भक्ति का उत्सव रचती है।
जिम उपकरणों की आहट में
स्वास्थ्य और साधना का संगम मिलता है।
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक का पावन दान—
51-51 हजार की अर्पण राशि,
सीमेंट की बेंचों का स्नेहिल उपहार,
और दान पट्टिकाओं की अमर स्मृति—
संस्थान की सेवा-गाथा को
और भी उज्ज्वल बना देती है।
यह शक्ति पीठ केवल मंदिर नहीं,
एक जीवंत संस्कार-धाम है,
जहाँ गायत्री का गान गूँजता है,
और हर हृदय में नई चेतना का दीप जलता है।
गायत्री शक्तिपीठ शामगढ़-मंदसौर-मध्य प्रदेश हेतु
समाजसेवी डॉ.दयाराम जी आलोक द्वारा
51-51 हजार रुपये के दो दान समर्पित
श्रीराम शर्मा आचार्य के युग परिवर्तनकारी विचारों को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से सम्पूर्ण विश्व मे गायत्री शक्ति पीठों की स्थापना की गई है | इन शक्ति पीठों के माध्यम से आम जन मानस मे उत्तम संस्कारों के बीज बोए जाते हैं| उल्लेखनीय है कि गायत्री शक्ति पीठ आध्यात्मिक और धार्मिक आयोजन के लिए ख्याति प्राप्त संस्थान है| विभिन्न फलों का रसाहार भी यहाँ लागत मूल्य पर उपलब्ध है| व्यायाम के लिए जिम जैसे उपकरण लोगों को आकर्षित करते हैं|गुरु पूर्णिमा जैसे खास अवसरों पर भंडारा का आयोजन संस्था की विशेषताओं मे से एक है| समाजसेवी डॉ.दयाराम जी आलोक ने राजस्थान और मध्यप्रदेश के चयनित मंदिरों को नकद दान और सीमेंट की बेंच भेंट करने के अपने आध्यात्मिक दान अनुष्ठान के परिप्रेक्ष्य मे गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ को 51-51 हजार रुपये के दो दान डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से समर्पित किए हैं| तीन सीमेंट की बेंच भी प्रांगण मे रखवा दी गईं हैं| संस्थान द्वारा दान दाता की दान पट्टिकाएं दर्शनीय स्थानों पर स्थापित करवाई है| गायत्री मंदिर मे राशि और नक्षत्र के हिसाब से लगे पेड़ पौधे बेहद नयनाभिराम हैं|
गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ का मनोरम दृश्य
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान -पथ
साथियों,
शामगढ़ नगर अपने दानशील व्यक्तियों के लिए जाना जाता रहा है| शिव हनुमान मंदिर,मुक्तिधाम ,गायत्री शक्तिपीठ आदि संस्थानों के जीर्णोद्धार और कायाकल्प के लिए यहाँ के नागरिकों ने मुक्तहस्त दान समर्पित किया है| परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है| मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 5 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|
शामगढ़ की गायत्री शक्तिपीठ मे गुरु पूर्णिमा पर्व पर संस्थान से जुड़े सैंकड़ों परिवारों का सहभोज आयोजित किया गया| इस संस्थान को साहित्य मनीषी ,समाज सेवी डॉ.दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर 9826795656 ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा नव निर्माण कार्यों हेतु 51 हजार रुपये तथा गायत्री शक्ति पीठ के अंतर्गत संचालित ज्ञान मंदिर हेतु भी 51 हजार रुपये का दान दिया गया|यह शक्तिपीठ डिम्पल चौराहे के पास सगोरिया रोड पर स्थित है| रमेशजी राठौर आशुतोष संस्थान के मुख्य प्रबंधक हैं| यह संस्थान स्वास्थ्यकारी जूस सेंटर भी चलाता है| जिसमे कई प्रकार के फलों के रस सहजता से लागत मूल्य पर उपलब्ध हैं|
आद्यात्मिक दान-पथ साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं. डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube पर विडियो से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
श्री राम मंदिर लसु डिया हेतु
17501/- की (5 बेंच+ 2001/- नकद दान)
श्री राम मंदिर लसु डिया मे 5 बेंच लगीं 20/12/2022
गोविंद जी पंवार टेलर गारिया खेड़ी ने यह विडिओ अपनी आवाज मे बनाया
राम मंदिर लसूडीया के विकास हेतु 2000 रुपये दुर्गा शंकर जी पुजारी को फोन पे किए
श्री राम मंदिर लसिडिया के शुभ चिंतक -
श्री भवानी शंकरजी चौहान टेलर 89896-92699 का सूझाव
मंदिर के मुख्य पुजारी दुर्गा शंकर जी बैरागी हैं|
श्री राम मंदिर ग्राम लसूड़ीया तहसील गरोठ बहुत ही सुंदर है और दीवारों पर देवी देवताओं के बहुत ही आकर्षक चित्र बनाए हुए हैं| साहित्य मनीषी डॉ .दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ.अनिल कुमार जी राठौर ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा इस मंदिर के प्रांगण मे दर्शनार्थियों के बैठने कि सुविधा हेतु 5 सीमेंट बेंच और मंदिर के विकास के लिए 2000 हजार रुपये भेंट किए| मंदिर के मुख्य पुजारी दुर्गा शंकर जी बैरागी हैं| गारिया खेड़ी निवासी गोविंद जी पंवार ने अपनी आवाज मे बनाया है|
डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक99265-24852,दामोदर पथरी अस्पतालशामगढ़ 98267-95656 द्वारा श्री राम मंदिर लसूडीयाहेतु दान सम्पन्न 20/12/2022
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले का गाँव बालोदा चम्बल नदी की गाँधीसागर झील के समीप स्थित है। यहाँ का बालाजी का मंदिर गाँव के बीच मे है और लोगों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मंदिर के सामने खुला प्रांगण है। मंदिर बहुत छोटा है और टीन के चद्दर लगे हुए हैं। मंदिर प्रबंधन की समिति के लोगों मे ज्यादा उत्साह नहीं दिखाई दिया । फिर भी समाज सेवी डॉ .दयाराम जी आलोक शामगढ़ ने अपने आध्यात्मिक दान-पथ के सिलसिले मे शामलाल जी विश्वकर्मा मिस्त्री के अनुरोध पर आँख मूदकर भरोसा करते हुए इस मंदिर मे 4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की हैं।खुले मे पड़ी होने और देख रेख के अभाव मे एक बेंच टूट गई है, दान दाता का शिलालेख भी विस्थापित कर दिया गया है। दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ के माध्यम से इस छोटे से गाँव के 3 मंदिरों मे सिमेन्ट की 9 बेंच की व्यवस्था की गई है। हमारी टीम जब बलोदा पहुंची तो अनुभव किया कि शामलाल जी विश्वकर्मा पर भरोसा करना गलत निर्णय था। एक अन्य मंदिर के प्रबंधक शामनाथजी जो योगी हैं।ये मंदिर मे शिलालेख लगाने की अपनी बात पर कायम रहने वाले व्यक्ति नहीं हैं। जिन मंदिरों मे ऐसे प्रबंधक हों वहाँ बाहर के दान दाताओं को दान देते वक़्त आँख खुली रखकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। नृसिंह मंदिर चंद्रावत राजाओं द्वारा निर्मित है जितेंद्र सिंग जी रावले ने नया निर्माण करवाया है। रावले ने नृसिंग मंदिर मे बेंच भेंट के लिए आभार माना !दान दाता को संतुष्ट करना मंदिर समितियों का दायित्व बनता है.
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
साहित्य मनीषी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-पथ
मित्रों , परमात्मा की असीम अनुकंपा और
कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,नीमच ,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है| मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 6 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|
बालोदा मंदसौर जिले का चम्बल नदी के पास बस हुआ छोटा सा गाँव है| इस गाँव मे बालाजी का मंदिर है| यह मंदिर स्थानीय और आस पास के ग्रामीण अञ्चल के आस्थावान हिन्दू लोगों के लिए हनुमान जी के प्रति अपनी श्रद्धा भक्ति प्रदर्शित करने का धर्म स्थल है| इस मंदिर के लिए यात्रा करने के लिए शामगढ़,गरोठ ,सुवासरा ,मंदसौर से बसें उपलब्ध हो जाती हैं| मंदिर मे दर्शनार्थियों के बैठने की सुविधा हेतु समाज सेवी डॉ. दयाराम जी आलोक 9926524852 के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय 9826795656 ,शामगढ़ द्वारा 4 सीमेंट बेंच और 1501/- नकद दान समर्पित किया गया है|
गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ में विकास एवं निर्माण हेतु
समाजसेवी डॉक्टर दयाराम जी आलोक द्वारा
५१ -५१ हजार के दो दान समर्पित किये गए.
गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ एक अद्वितीय आध्यात्मिक स्थल है, जो न केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ वाचनालय, व्यायाम के उपकरण, स्वास्थ्य वर्धक पेय और वानस्पतिक जड़ी बूटियों की व्यवस्था इस शक्तिपीठ की विशेषता को दर्शाती है।
मंदिर में माँ गायत्री, माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी जी की आकर्षक प्रतिमाएँ इस स्थल की आध्यात्मिक महत्ता को बढ़ाती हैं। गुरु पूर्णिमा पर आयोजित भंडारा और 'माला के मोती' ग्रुप की गतिविधियाँ इस स्थल की लोकप्रियता को दर्शाती हैं।
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोकजी का 51 हजार का नकद दान और समाज सेवी रमेश चंद्र जी राठौर "आशुतोष" की महती भूमिका इस स्थल के निर्माण और प्रबंधन में उल्लेखनीय है। मोहन जी जोशी गायत्री के प्रखर प्रवक्ता हैं और गायत्री के अनुष्ठान में उनकी अग्रणी भूमिका भी प्रशंसनीय है।
गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ ने हिन्दू धर्मावलंबियों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल कर ली है, जो इसकी आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों के कारण है। यह स्थल लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरा है
स्व. श्रीमति शांति देवी धर्म पत्नि डॉ .दयाराम जी आलोक की स्मृति मे पुत्र डॉ अनिल कुमार राठौर ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ द्वारा ज्ञान मंदिर के लिए 51 हजार दान का शिलालेख लगवाया
ज्ञान मंदिर मे शिलालेख लगाया गया
(यह 51 हजार का नकद दान डॉ. अनिल कुमार राठौर की स्वर्गीय मातुश्री श्रीमति शान्ति देवी धर्मपत्नी डॉ.दयाराम जी आलोक की पुण्य स्मृति में समर्पित )
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आद्यात्मिक दान-पथ साहित्य मनीषी डॉ.दयाराम जी आलोक राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के मंदिरों ,मुक्ति धाम और गौशालाओं में निर्माण व विकास हेतु नकद और आगंतुकों के बैठने हेतु सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं. डॉ.आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ आध्यात्मिक दान-पथ पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने हेतु सीमेंट बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में आपकी वो राशि भी शामिल है जो google कंपनी से उनके ब्लॉग और You tube पर विडियो से प्राप्त होती है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.
शामगढ़ गायत्री शक्तिपीठ के ज्ञान मंदिर हेतु 51 हजार रु. का प्रथम दान
गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ के अंतर्गत ज्ञानमंदिर के उदघाटन का विडियो
विडियो गुरु पूर्णिमा गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ 3/7/2023
गायत्री शक्तिपीठ का दृश्य
डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा गायत्री शक्तिपीठ के अंतर्गत ज्ञान मंदिर हेतु 51 हजार का प्रथम दान समर्पित
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शामगढ़ की गायत्री शक्तिपीठ हेतु
विकास और निर्माण कार्य के लिए 51 हजार रुपये का दूसरा दान समर्पित
शामगढ़ गायत्री शक्तिपीठ का विडियो
मोहन लाल जी जोशी 95888-27033 गायत्री के प्रखर प्रवक्ता की प्रेरणा
राजू जी छाबड़ा ९४२५९-७८५८४ का सुझाव
गायत्री शक्तिपीठ का प्रबंधन रमेशजी राठौर आशुतोष-99264-26499 करते हैं.
डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा गायत्री शक्ति पीठ शामगढ़ हेतु 51 हज़ार का दूसरा नक़द दान सम्पन्न
मध्य प्रदेश के मंदसौर शहर के शिवना तट स्थित मुक्तिधाम हेतु
समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा
18 सिमेन्ट बेंचें समर्पित
मंदसौर मुक्तिधाम सुशोभित, दयाराम आलोक कृपा अपार ।
अठारह आसन दान किए, जनसेवा का उज्ज्वल विस्तार ॥
समिति ने पट्ट प्रतिष्ठित किया, दानदाता का गौरव मान ।
प्रेरणा जग में सतत रहे, आगंतुक पाए सुविधा सम्मान ॥
मंदसौर शहर का मुक्ति धाम शिवना नदी के किनारे स्थित है| यहाँ का मुक्ति धाम शांतिलाल जी बड़जात्या और उनकी टीम के अनवरत प्रयासों से एक आदर्श मुक्ति धाम बन गया है| मुक्ति धाम मे बैठक सुविधा को विस्तार देते हुए साहित्य मनीषी ,समाज सेवी डॉ.दयारामजी आलोक के आदर्शों से प्रेरित पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर 9826795656 ,दामोदर पथरी चिकित्सालय ,शामगढ़ ने इस संस्थान को 20 सीमेंट बेच भेंट की|सभी भेंट की गई |बेंचें श्रद्धान्जली सभा हाल में लगा दी गई हैं. ज्ञातव्य है कि हमारी संस्था दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा मध्य प्रदेश और राजस्थान के नीमच,मंदसौर,रतलाम,झाबुआ,झालावाड,आगर जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम को सीमेंट बेंच और नकद दान का अनुष्ठान चलाया हुआ है.
मंदसौर मुक्तिधाम सुशोभित, दयाराम आलोक कृपा अपार ।
अठारह आसन दान किए, जनसेवा का उज्ज्वल विस्तार ॥
समिति ने पट्ट प्रतिष्ठित किया, दानदाता का गौरव मान ।
प्रेरणा जग में सतत रहे, आगंतुक पाए सुविधा सम्मान ॥
मंदसौर के मुक्तिधाम में 51 हजार दान का शिलालेख स्थापित किया गया
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम जी आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-पथ
मंदसौर मे शिवना के किनारे
मुक्तिधाम के लिए 18 सिमेन्ट बेंच भेंट.
Video of Bench donation to mukti dham Mandsaur
मुक्ति धाम मंदसौर के श्रद्धांजलि हाल में १८ बैंच लगीं
मंदसौर के मुक्ति धाम मे डॉ.अनिल कुमार ,दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ की तरफ से
मातुश्री शांति देवी w/o डॉ.दयाराम जी आलोक की स्मृति में 18 बेंच लगी
मुक्ति धाम मंदसौर के शुभचिंतक ,प्रबंधक , संरक्षक -
जवाहर लाल जी जैन मुक्तिधाम समिति के सचिव हैं.
समाज सेवी सुनील जी बंसल
शांतिलाल जी बड़जात्या 94259 23534 समिति के अध्यक्ष हैं.
मुक्ति धाम मंदसौर में शमशान समिति के पदाधिकारी कर्मचारी मानव की अंतिम सेवा कर अदा कर रहे इंसानियत का फर्ज समाज सेवी व शमशान समिति के पदाधिकारी श्री शांतिलाल जी बडजात्या मंदसौर में मानव की अंतिम सेवा कर अदा कर रहे इंसानियत का फर्ज |श्री सुनील जी बंसल दे रहे पिछले 25 वर्षों से नी स्वार्थ सेवा निरंतर कर रहे है। कोरो ना काल में शमशान समिति के माध्यम से कर्मचारी नगर पालिका कर्मी के सहयोग से करवा रहे अंतिम संस्कार की सभी तैयारी मृतकों के परिजनों को दुःख की घड़ी में करते है मदद जो लोग मुक्ति धाम से उनके परिजनो की अस्तिया हरिद्वार नहीं ले जा पाते उनकी मदद कर उनकी व कई लावारिश अस्थियों को हर वर्ष करते है गंगा जी में विधि विधान से प्रवाहित |
डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़98267-95656 द्वारा मंदसौर के मुक्तिधाम हेतु 18 बेंच दान सम्पन्न
मोची समाज के लोग चमड़े का काम करने वाले या जूते बनाने वाले होते हैं. मोची शब्द संस्कृत के 'मुञ्चक' या फ़ारसी के 'मोजा' और 'ई' से मिलकर बना है, जिसका मतलब है छुड़ाना. मोची समाज के लोग कई जातियों के गांवों में रहते हैं, लेकिन अपने अलग-अलग क्वार्टर में रहते हैं. हरियाणा के मोची का दावा है कि वे राजस्थान से पलायन करके आए हैं और मुख्य रूप से अंबाला के छावनी शहर में पाए जाते हैं. वे अभी भी ब्रजभाषा बोलते हैं और अंतर्जातीय विवाह करते हैं. फैक्ट्री निर्मित जूतों के प्रसार के साथ मोची का पारंपरिक व्यवसाय कम हो गया है. बड़ी संख्या में मोची भूमिहीन कृषि मजदूर हैं, जिनमें से कुछ अन्य व्यवसायों को अपना रहे हैं. मोची समाज को अनुसूचित जाति में रखा गया है और सकारात्मक कार्रवाई द्वारा समर्थित किया जाता है. मोची जाति को कुछ लोग चमार जाति की एक शाखा मानते हैं, लेकिन मोची ने इसे अस्वीकार कर दिया है, वे खुद को चमार से उच्च दर्जे की एक अलग जाति मानते हैं। चमार लोग खाल को संसाधित करते हैं, जबकि मोची इस कच्चे उत्पाद से चमड़े के उत्पाद बनाते हैं। अतीत में, कुछ मोची सड़े हुए मांस को हटाने और हड्डियों और खाल को बेचने में शामिल थे। मोची उपसमूहों और कुलों में विभाजित हैं, और उपसमूहों के बीच एक सामाजिक रैंकिंग प्रणाली है। मोची लोग मुख्य रूप से भारत और बांग्लादेश में रहते हैं, लेकिन नेपाल और पाकिस्तान में भी छोटे समुदाय हैं।
उनका जीवन किस जैसा है?
चमड़े के उत्पाद बनाने के साथ-साथ मोची ईंटें और टोकरियाँ भी बनाते हैं। साल के एक निश्चित समय में, मोची परिवारों में सभी ईंटें बनाते हैं। हालाँकि, केवल पुरुष ही टोकरियाँ बनाते हैं। वे अपनी टोकरियाँ बेचने और दूसरे लोगों के खेतों में मज़दूर के रूप में काम करने जैसी आर्थिक गतिविधियों के ज़रिए दूसरे समुदायों से नियमित संपर्क में रहते हैं। मोची लोगों की कुछ बुरी स्वास्थ्य आदतें हैं जैसे सूअर का मांस खाना, धूम्रपान करना, पान चबाना और पुरुषों के मामले में शराब पीना।
उनकी मान्यताएं क्या हैं?
मोची लोग हिंदू धर्म का पालन करते हैं, जो भारत का प्राचीन धर्म है। हिंदू धर्म दक्षिण एशिया के स्थानीय धर्मों के लिए एक व्यापक मुहावरा है, इसलिए यह बहुत विविध है। लोकप्रिय स्तर पर, हिंदू हिंदू देवताओं की पूजा और सेवा करते हैं। वे हिंदू मंदिरों में जाते हैं और सुरक्षा और लाभ प्राप्त करने की उम्मीद में अपने देवताओं को प्रार्थना, भोजन, फूल और धूप चढ़ाते हैं। ईसाई या यहूदियों की तरह उनका अपने देवताओं के साथ कोई व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध नहीं है। ऐसे अन्य हिंदू भी हैं जो बहुत अधिक दार्शनिक हैं, खासकर ब्राह्मणों में। लगभग सभी हिंदू होली, रंगों का त्योहार और वसंत की शुरुआत / दिवाली, रोशनी का त्योहार / नवरात्रि, शरद ऋतु का उत्सव / और राम नवमी, राम के जन्मदिन जैसे वार्षिक उत्सवों में भाग लेते हैं।मोची दक्षिण एशिया में पाया जाने वाला एक व्यवसायिक जाति समुदाय है. चमड़े के जूते बनाना इनका पारंपरिक कार्य रहा है. ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय चमड़े के सुरक्षात्मक शिल्प के निर्माण में शामिल था. सैनिकों के लिए सुरक्षात्मक चमड़े के कपड़े निर्माण में शामिल होने के कारण यह समुदाय सेना के साथ निकटता से जुड़ा हुआ था. जूता निर्माण करना इनका पारंपरिक व्यवसाय था, लेकिन कारखानों में निर्मित जूतों के प्रसार के कारण इनके पारंपरिक व्यवसाय में गिरावट आई है. वर्तमान में अधिकांश मोची ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं, और स्थानीय रूप से प्रभावशाली जातियों पर निर्भर हैं. यह खेतिहर मजदूरों के रूप में काम करते हैं. इन्हें रोजी-रोटी की तलाश में शहरी क्षेत्रों में पलायन करना पड़ता है. यह अन्य व्यवसायों भी अपनाने लगे हैं.
आइए जानते हैं मोची समाज का इतिहास,
मोची ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ मुञ्चक या फा़॰ मोजा (= जूता) + ई (प्रत्य॰) (= चमड़ा) छुड़ाना] चमड़े का काम बनानेवाला । वह जो जूते आदि बनाने का व्यवसाय करता हो ।
पाटनवाडा गुजराती मोची समाज की महिलाएं
मोची किस कैटेगरी में आते हैं?
गुजरात में, मोची (हिंदू) जाति को बक्शीपंच में ओबीसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है. उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मोची को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. भारत के कई राज्यों में इन्हें अनुसूचित जाति (scheduled caste) के रूप में वर्गीकृत किया गया है.
मोची की जनसंख्या, कहां पाए जाते हैं?
यह मुख्य रूप से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में पाए जाते हैं. भारत में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात में पाए जाते हैं. पंजाब में यह व्यापक रूप से पाए जाते हैं और लगभग हर जिले में निवास करते हैं. हरियाणा के मोची राजस्थान से पलायन करने का दावा करते हैं. यह मुख्य रूप से अंबाला के छावनी शहर में पाए जाते हैं.
बांसवाडा में मोची समाज की महिलाऐं एक सामाजिक उत्सव में
मोची किस धर्म को मानते हैं?
धर्म से यह हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई या बौद्ध हो सकते हैं. भारत में पाए जाने वाले ज्यादातर मोची हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं. मुस्लिम मोची भी पहले हिंदू थे जो 14 वीं मई और 16 वीं शताब्दी के बीच धर्म परिवर्तन करके मुसलमान हो गए. विभाजन के पूर्व पंजाब के अधिकांश मोची को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया था. मुस्लिम मोची पूरे उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं, लेकिन लखनऊ और फैजाबाद जिलो में इनकी अधिक एकाग्रता है. यह सुन्नी इस्लाम का अनुसरण करते हैं. अन्य मुसलमानों की तरह, यह बरेलवी और देवबंदी विभाजन में विभाजित हैं. हिंदी, अवधी और उर्दू भाषा बोलते हैं. पाकिस्तान और बांग्लादेश में पाए जाने ज्यादातर मोची मुस्लिम हैं.
मोची समाज छोटा होने के बावजूद अनुशासन और अपनी धार्मिक भावना में अग्रणी है। यहां पर समाज में किसी भी प्रकार के विवाद को समाज के पंचों के माध्यम से निपटाया जाता है। करीब 95 प्रतिशत को समाज स्तर पर ही सुलझाया गया है। समाज अध्यक्ष नानुराम मोची, कोषाध्यक्ष शिवराम मोची, सचिव शिवराम मोची और संरक्षक बसंतलाल मोची हैं। समाज के समक्ष सास-बहू, ननद-भाभी और पिता पुत्र जैसे मामले भी आए हैं। इन्हें समाज स्तर पर निपटारा कराया गया है। कई मामलों मे कोर्ट के निर्णय से पहले राजीनामा कर समाज की मुख्यधारा से लोगों को जोड़ने का प्रयास किया गया है। समाज के 16 गांवों के चौखला स्तर पर मामले को निपटाने के लिए सहयोग लिया जाता है। समाज के लोग कुवैत में ज्यादा रोजगाररत हैं। ऐसे में समाज एकरूपता और अनुशासन के साथ विकास कर रहा है। हर 1 तारीख को मासिक बैठक का आयोजन होता है। इसमें समाज में किसी भी प्रकार विवाद उसी समय पंचों के सामने सुलझाया जाता है। जिसे पूरा समाज स्वीकार करता है। समाज में परिवारों के विवाद निपटारे के साथ ही शराबबंदी पर भी सख्ती की गई है। समाज के किसी भी प्रोगाम में शराब पर रोक लगा रखी है। समाज में सरकारी नौकरी के साथ ही व्यापार में भी अव्वल है।
मोची शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?
मोची संस्कृत के शब्द मोचिका से बना है, जिसका अर्थ होता है- मोची या जूता बनाने वाला (cobbler). परंपरागत रूप से यह गांव में जूता बनाने का कार्य करते थे. मूल रूप से चमार जाति से संबंध रखते हैं. यह मूल रूप से चमार जाति की एक शाखा हैं. Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content को अपने बुद्धी विवेक से समझे।