लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। सनातन आध्यात्म -जाति इतिहास-दान विमर्श

25.6.24

श्री पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी में बेंच व्यवस्था :दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ का पावन दान


                    



भूमिका : सेवा और श्रद्धा का संगम - श्री पंचमुखी बंजारी बालाजी धाम, सुराखेड़ी

श्री पंचमुखी बालाजी की जय हो !

धर्म और समाज सेवा जब एक साथ मिलते हैं, तभी किसी तीर्थ स्थल की सार्थकता सिद्ध होती है। मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में स्थित श्री पंचमुखी बंजारी बालाजी धाम, सुराखेड़ी ऐसा ही एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है, जहाँ श्रद्धा को सुविधा का संबल मिल रहा है।

इस पावन धाम की कई विशेषताएं इसे विशिष्ट बनाती हैं -

मंदिर की महिमा और विशेषताएं:
यह धाम पंचमुखी बालाजी को समर्पित है। यहाँ वर्ष भर धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन होता रहता है, जिसमें प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली श्रीमद् भागवत कथा प्रमुख है। इस कथा श्रवण का लाभ लेने सैकड़ों श्रद्धालु यहाँ एकत्रित होते हैं। मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसका सुगम स्थान है। यह मंदिर बोलिया से शामगढ़ जाने वाली सड़क पर, बोलिया से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर, सड़क के बिल्कुल समीप स्थित है, जिससे दर्शनार्थियों का आवागमन कभी बाधित नहीं होता।
इसी धाम की सेवा और दर्शनार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक छोटा सा सेवा-प्रयास किया गया है।
दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा 4 सीमेंट बेंच समर्पित:
दिनांक 9/7/2024 को दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से डॉ. दयाराम जी आलोक एवं डॉ. अनिल कुमार दामोदर S/o डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा श्री पंचमुखी बालाजी मंदिर, सुराखेड़ी के प्रांगण हेतु 4 सीमेंट बेंचें समर्पित की गईं।
इस दान का उद्देश्य मंदिर में आने वाले वृद्ध, महिलाओं एवं कथा श्रवण करने वाले श्रद्धालुओं को बैठने की सुविधा प्रदान करना है। यह छोटा सा सहयोग मंदिर की सुंदरता और उपयोगिता को बढ़ाता है।
इस पुनीत अवसर पर मंदिर के शुभचिंतक श्री लाल सिंह जी सिसोदिया (अध्यक्ष शिव सेना), श्री सज्जन सिंह जी सिसोदिया, श्री करण सिंह जी नेताजी (सचिव समिति) एवं पुजारी श्री राजेन्द्र पुरोहित सहित मंदिर समिति के सदस्यों ने दानदाता का सम्मान करते हुए हृदय से आभार व्यक्त किया। दानदाता की दान पट्टिका को सम्मान स्वरूप मंदिर की दीवार पर स्थापित किया गया है।
निश्चित ही डॉ. दयाराम जी आलोक का यह दान समाज सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी कदम है।

श्री पञ्च मुखी बंजारी बालाजी धाम सुराखेड़ी  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 







पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी का विडिओ 


मंदिर मे डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा भेंट की गई 4 बेंच दर्शाता विडिओ 




दान दाता की दान पट्टिका मंदिर की दीवार पर स्थापित की गई


 दान दाता की दान पट्टिका भेजी गई 




पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी को 
4 सिमेन्ट बेंच दान
 
पञ्चमुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी के प्रांगण  मे बेंच का दृश्य 
.9/7/2024


पञ्चमुखी बालाजी मंदिर  सुराखेड़ी का विडिओ 

पञ्च मुखी बालाजी के मंदिर के शुभचिंतक 

लाल सिंग जी  सीसोदिया: अध्यक्ष  शिव सेना -9770012197 
सज्जन सिंग जी सीसोदिया --7617243841
करण सिंगजी  नेताजी :सचिव समिति 
राजेन्द्र पुरोहित :पूजा -पाठ  

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्री पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी  हेतु 4 सिमेन्ट बेंच समर्पित  9/7/2024 
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

*दामोदर दर्जी समाज महासंघ  आयोजित सामूहिक विवाह के विडिओ 

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पौराणिक कहानियाँ के विडिओ 

मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*दर्जी  वैवाहिक  महिला संगीत के विडिओ 

*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ  भाग 6 

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23.6.24

श्री हनुमान मंदिर जूनाखेड़ा पिपल्या हमीर आगर मालवा में लगेंगी सीमेंट बैंच

 श्री हनुमान मंदिर जूनाखेड़ा पिपल्या हमीर आगर -मालवा हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 

जूनाखेड़ा  पिपल्या हमीर  का  हनुमान जी का मंदिर आगर से बडोद जाने वाले मार्ग पर स्थित है। आगर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। बनावट और स्थापत्य  मनोहारी है। रंग रोगन की तो बात ही मत पूछो । यह  मंदिर क्षेत्र की  हिन्दू आबादी की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। यहाँ अखंड रामायण का पाठ भी निरंतर होता रहता है। अमृत लाल जी व्यास टोंकड़ा  शामगढ़ आए और इस मंदिर के लिए 4 बेंच दान करने का अनुरोध किया । दामोदर पथरी चिकित्सालय की दान समिति ने प्रस्ताव स्वीकृत किया और  दान पट्टिका बनाकर  मंदिर को भेज दी गई है । मंदिर के शुभचिंतक लाल सिंग जी ने मंदिर मे दान पट्टिका स्थापित करने का स्थान का फ़ोटो भेजा। दान पट्टिका लगाने पर बेंचें भेजी जाएंगी। जय हो जूनाखेड़ा बजरंगबली!

जूनाखेड़ा हनुमान मंदिर पिपल्या हमीर का विडिओ 


पिपल्या हमीर मंदिर हेतु दान पट्टिका 
जूनाखेड़ा हनुमान मंदिर पिपल्या हमीर लालसिंग जी ने प्लेट लगाने की जगह बताई 




दान पट्टिका निर्धारित स्थान पर लगाने पर दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ की तरफ से सिमेन्ट की 4 बेंच  भेजी जाएंगी 
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22.6.24

मुक्ति धाम भानपुरा: जहां थमती हैं साँसे वहाँ आलोकजी का बेंच दान :आगंतुक सुविधा सम्मान :Muktidham Bhanpura


    जीवन के अंतिम सत्य से साक्षात्कार कराता एक तीर्थ

                            



भारतीय मनीषा में श्मशान को अशुभ नहीं, अपितु बोध का स्थल कहा गया है। वहाँ जाकर मनुष्य को जीवन की नश्वरता और कर्म की शाश्वतता का बोध होता है। ऐसा ही एक बोध-स्थल है - मंदसौर जिले के भानपुरा नगर का मुक्तिधाम।

यह पावन स्थल प्रसिद्ध छोटे-बड़े महादेव पर्यटन मार्ग पर स्थित है, जहाँ से गुजरता हर पथिक एक क्षण ठहर कर जीवन के गहन अर्थ पर चिंतन करता है।
विकास की ओर बढ़ते चरण

आज भानपुरा मुक्तिधाम केवल एक श्मशान घाट नहीं, बल्कि जन-आस्था और सामुदायिक चेतना का केंद्र बन रहा है। मुक्तिधाम समिति की सतत देखरेख में यहाँ विकास के कई कार्य मूर्त रूप ले रहे हैं। श्रद्धांजलि हेतु एक सुदृढ़ बरामदा निर्मित किया गया है, लकड़ी के लिये एक सुरक्षित गोदाम कक्ष बनाया गया है, फर्श पर स्वच्छ टाइल्स लगाई गई हैं और परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया है। यद्यपि बंदरों के उत्पात से इन पौधों को पनपने में बाधा आती है, फिर भी समिति का संकल्प अडिग है - इस अंतिम विश्राम स्थल को शांत, स्वच्छ और गरिमामय बनाना।

इसी सौंदर्य और सुविधा की कड़ी में एक अत्यंत प्रेरणादायी अध्याय जुड़ा है।
11 बेंचों का मौन समर्पण - दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा

समाजसेवी, सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. दयाराम आलोक जी ने एक अलौकिक अनुष्ठान का संकल्प लिया है - मध्यप्रदेश और राजस्थान के चयनित मुक्तिधामों में जन-विश्राम हेतु सीमेंट की बेंचें भेंट करना।

इसी अनुष्ठान के अंतर्गत भानपुरा मुक्तिधाम के श्रद्धांजलि सभागृह में दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से 11 सीमेंट बेंचें ससम्मान समर्पित की गई हैं।

यह केवल बेंचें नहीं हैं, यह उस संवेदना की प्रतीक हैं जो शोक-संतप्त परिवार को कुछ पल बैठने, संबल पाने का स्थान देती हैं। इस पुनीत कार्य में भानपुरा के हितचिंतक श्री मदनलाल जी परमार, श्री रमेश जी राठौर आशुतोष, शामगढ़ के सुझाव और मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष श्री मनोज जी मंगलोरिया के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दान की इस भावना को चिरस्थायी बनाने हेतु मुक्तिधाम समिति ने बरामदे के पिलर पर दान-पट्ट स्थापित किया है, ताकि यह देखकर और भी हृदयों में दान की प्रेरणा जागृत हो। इस दान को संपन्न कराने में डॉ. अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ. दयाराम जी आलोक, दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ का सेतु-कार्य अविस्मरणीय है।
एक पेंशन, एक संकल्प - आध्यात्मिक दान-पथ

इस छोटी सी घटना के पीछे एक बहुत बड़ा जीवन-दर्शन है, जिसे डॉ. आलोक जी ने 'आध्यात्मिक दान-पथ' नाम दिया है।

1. सेवानिवृत्ति के बाद समाज को समर्पण: एक शिक्षक के रूप में जीवन भर ज्ञान बाँटने के बाद, उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति की 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण में अर्पित करने का दृढ़ संकल्प लिया।

2. स्व-वित्तपोषित और तकनीक से जुड़ा मॉडल: यह दान किसी चंदे पर नहीं, बल्कि उनकी स्वयं की पेंशन और डिजिटल साधना - अर्थात उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो से गूगल से प्राप्त आय पर आधारित है। यह सिद्ध करता है कि तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए भी किया जा सकता है।

3. व्यापक और सुविधा-केंद्रित दृष्टि: उनका कार्य किसी एक जिले तक सीमित नहीं। मंदसौर, नीमच, झालावाड़, आगर, रतलाम, झाबुआ जिलों के मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों तक यह धारा बह रही है। वे बड़ी घोषणाओं में नहीं, बल्कि वृद्धों और यात्रियों के लिए बैठने की छोटी-छोटी पर आवश्यक सुविधाओं में विश्वास रखते हैं। अब तक 151 से अधिक संस्थानों में वे बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन और जीर्णोद्धार में सहयोग कर चुके हैं।

इसी भाव को इस पंक्ति में समेटा गया है -


दानं धर्मस्य मूलं हि, लोकहिताय समर्पितम्।
भानपुरे मुक्तिधामे, बेंचाः एकादशाः स्थिताः॥
आलोकस्य संकल्पेन, समाजे जागृतिर्नव।
पथरीदामोदरालयेन, श्रद्धया सेव्यते सभाः॥

भानपुरा मुक्तिधाम में लगी ये 11 बेंचें ईंट-सीमेंट की संरचना मात्र नहीं, बल्कि एक शिक्षक के जीवन भर की कमाई से उपजा करुणा का दीप हैं, जो हमें सिखाता है कि अंतिम विदाई के स्थल को भी हम अपनी श्रद्धा से कितना मानवीय और सुंदर बना सकते हैं।

भानपुरा के मुक्तिधाम हेतु

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

11 सीमेंट बेंच समर्पित 


भानपुरा मुक्तिधाम में श्रद्धा का दीप, दान की धारा बहती अतीव। ग्यारह बेंचें समर्पित हुईं यहाँ, आलोकजी के संकल्प से जगमग हुआ जहाँ।

बरामदा, टाइलों का फर्श, वृक्षों की छाया, समिति के प्रयासों से बढ़ा सौंदर्य की माया। दान पट्ट अंकित हुआ पिलर पर महान, प्रेरणा बनेगा यह अद्भुत दान।

आध्यात्मिक पथ पर आलोकजी अग्रसर, पेंशन और आय का किया समर्पण अमर। मंदसौर, नीमच, झालावाड़, आगर के धाम, दान से प्रकाशित हुआ हर मुक़ाम।

श्लोक-

दानं धर्मस्य मूलं हि, लोकहिताय समर्पितम्। भानपुरे मुक्तिधामे, बेंचाः एकादशाः स्थिताः॥ आलोकस्य संकल्पेन, समाजे जागृतिर्नव। पथरीदामोदरालयेन, श्रद्धया सेव्यते सभाः॥


 मंदसौर जिले के भानपुरा नगर में स्थित मुक्ति धाम एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो छोटे-बड़े महादेव पर्यटन स्थल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है।
यहाँ विकास कार्य जारी हैं, जिसमें एक बरामदा और लकड़ी का गोदाम वाला कमरा बनाया गया है। फर्श पर टाइल्स लगाई गई हैं और कुछ पेड़ भी लगाए गए हैं। हालांकि, बंदरों के उत्पात से पेड़-पौधों के पनपने में रुकावट आती है
मुक्ति धाम समिति की देखरेख में विकास गतिविधियाँ चल रही हैं। समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक जी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मुक्ति धाम में लोगों के विश्राम के लिए सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने का अनुष्ठान चलाया है। इसी सिलसिले में, इस शमशान घाट के लिए 11बेंचें भेंट करने का निर्णय लिया गया और दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से सभी 11बेंचें श्रद्धांजलि सभागृह में सजा दी गईं।
मुक्ति धाम समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने दान दाता  का दान पट्ट  बरामदे  के पिलर पर स्थापित कर दिया है ताकि अन्य लोगों को दान की प्रेरणा मिलती रहे । 

मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

   डॉ .दयाराम आलोकजी का



आद्यात्मिक दान -पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

                           
                                                        
भानपुरा के मुक्तिधाम को
 11  बेंच भेंट 


भानपुरा मुक्तिधाम समिति का आभार - पत्र 


मुक्ति धाम भानपुरा  के हित चिंतक -

 मदन लाल जी परमार भानपुरा 

रमेश जी राठौर आशुतोष शामगढ़ का सुझाव 

मनोज जी मंगलोरीया 80852-20499 अध्यक्ष मुक्तिधाम समिति 


 डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा भानपुरा  के मुक्ति धाम हेतु दान सम्पन्न 
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11.6.24

सतनामी संप्रदाय की जानकारी और इतिहास ,history of satnami samaj


सतनामी  समाज के इतिहास का विडिओ 





सतनामी संप्रदाय की स्थापना "बीरभान" नामक एक संत ने नारनौल में 1657 में की थी।
सतनामी अधिकतर किसान, दस्तकार तथा नीची जाति के लोग थे।
सत्य एवं ईश्वर में विश्वास रखने के कारण वे अपने को सतनामी पुकारते थे।
सतनामियों को एकेश्वरवादी संप्रदाय कहा गया है।
इनके धार्मिक ग्रंथ को पोथी कहा जाता था।
सतनामी अपने संपूर्ण शरीर के बालों को मूँड़कर रखते थे। इसी कारण उन्हें मुंडिया भी कहा जाता था।
विद्रोह के कारणसतनामी विद्रोह की शुरुआत एक सतनामी और मुगल सैनिक अधिकारी के बीच झगड़े को लेकर हुई।
1672 ई. में किसानों और मुगलों के बीच मथुरा के निकट नारनौल नामक स्थान पर एक युद्ध हुआ जिसका नेतृत्व सतनामी  संप्रदाय ने किया था।
विद्रोह तब भड़क उठा जब मुगल सैनिक ने सतनामी को मार डाला।
सतनामियों ने भी बदला लेने के लिये सैनिक को मार डाला तथा बदले में और मुगल सैनिकों को भेजा गया।
इस विद्रोह को तब कुचला जा सका जब औरंगजेब ने विद्रोह की कमान संभाली और सतनामियों को कुचलने के लिये तोपखाने के साथ 10,000 सैनिकों को भेजा।
विद्रोह को दबाने में स्थानीय हिन्दू ज़मींदारों (जिनमें अधिकतर राजपूत थे) ने मुगलों का साथ दिया था।

  प्रारंभिक सतनामी भिक्षुकों और गृहस्थों का एक संप्रदाय था जिसकी स्थापना 1657 में पूर्वी पंजाब के नारनौल में बीरभान ने की थी। 1672 में उन्होंने मुगल सम्राट औरंगजेब की अवहेलना की और उसकी सेना द्वारा कुचल दिए गए। 
उस संप्रदाय के अवशेषों ने 19वीं शताब्दी की शुरुआत में एक और संप्रदाय के गठन में योगदान दिया हो सकता है, जिसे साध (अर्थात, साधु , "अच्छा") के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपने देवता को सतनाम के रूप में नामित किया था। 
  सबसे महत्वपूर्ण सतनामी समूह की स्थापना 1820 में मध्य भारत के छत्तीसगढ़ क्षेत्र में हुई थी घासीदास, चमार जाति के सदस्य  थे और  वर्ण व्यवस्था के मुताबिक दलित या अछूत जाति जिसका वंशानुगत व्यवसाय चमड़ा बनाना था,ऐसे  लोगों को  हिंदू अपवित्र मानते थे । हालाँकि छत्तीसगढ़ के चमारों ने चमड़ा बनाना छोड़ दिया था और किसान बन गए थे, लेकिन उच्च हिंदू जातियाँ उन्हें अपवित्र मानती रहीं। उनके सतनाम पंथ ("सच्चे नाम का मार्ग") ने बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ी चमारों (जो इस क्षेत्र की कुल आबादी का छठा हिस्सा थे) को धार्मिक और सामाजिक पहचान दिलाने में सफलता प्राप्त की, जबकि उच्च जाति के हिंदुओं द्वारा उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता था और उन्हें हिंदू मंदिर पूजा से बाहर रखा जाता था। घासीदास को हिंदू देवताओं की मूर्तियों को कूड़े के ढेर में फेंकने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने नैतिक और आहार संबंधी संयम और सामाजिक समानता का उपदेश दिया। कबीर पंथ के साथ संबंध ऐतिहासिक रूप से कुछ चरणों में महत्वपूर्ण रहे हैं, और समय के साथ सतनामियों ने जटिल तरीकों से एक व्यापक हिंदू व्यवस्था के भीतर अपनी जगह बनाने के लिए बातचीत की थी 
भारतीय इतिहास के 18 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में एक अभूतपूर्व प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व लेकर छत्तीसगढ़ के इस विशाल भूभाग में महामानव  युग पुरुष संत बाबा गुरु घासीदास अवतरित हुए वे अपने युग के सजग प्रहरी थे। अंधविश्वास , एवं संकीर्ण मनोविज्ञान से भरी भूमि से समाज को ऊपर उठाने का आजीवन प्रयास किया। हिंदु समाज के मनु वादियों और उनके आडंबरों  पर कठोर  प्रहार किया।
   महाकौशल छत्तीसगढ़ की विशाल धरती पर गुरु घासीदास प्रथम व एक-मेव मनीषी हैं, जिन्होंने मानव द्वारा बनाए गए तथाकथित जाति व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था के उत्पीड़न के प्रति समाज को सजग बनाया।
   संत बाबा गुरु घासीदास ने सभी संप्रदायों में व्याप्त जड़ता का घोर विरोध किया, जो तर्क मूलक था । और इन्हीं आडंबर प्रधान संप्रदायों के विरोध में ही बाबा गुरु घासीदास ने सहज धर्म “ सतनाम धर्म ” को ही ससम्मान प्रतिष्ठापित किया।
 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content को अपने बुद्धी विवेक से समझे। 

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मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*दर्जी  वैवाहिक  महिला संगीत के विडिओ 

*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ  भाग 6 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 7 

*मनोरंजन,शिक्षा ,पर्यटन,उपदेश के विडिओ 

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ 

*जातियों के महापुरुषों की जीवनी के विडिओ 

*धार्मिक ,सामाजिक त्योहार व  जुलूस के विडिओ