26.6.24

आँजणा जाति की संघर्ष गाथा :राजाराम जी महाराज

आँजणा  चौधरी पटेल के इतिहास का विडिओ 





मित्रों ,जाति इतिहास के विडियो की श्रुंखला में आज आंजणा समाज की उत्पत्ति और इतिहास के बारे में चर्चा कर  रहे हैं 
  आंजना समाज, जिसे जाट, चौधरी, पटेल, या कलबी के नाम से भी जाना जाता है, की उत्पत्ति क्षत्रिय वर्ण से मानी जाती है. यह समाज मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़) और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाया जाता है. कृषि और पशुपालन इस समाज के लोगों की आय का मुख्य स्रोत है. आंजना समाज में, संत श्री राजारामजी महाराज ने समाज सुधारक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से अन्याय और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ.
आंजना समाज की उत्पत्ति के बारे में कुछ मुख्य बातें:
क्षत्रिय वर्ण:
आंजना समाज को क्षत्रिय वर्ण से संबंधित माना जाता है.
 
आंजणा के विभिन्न नाम:
इस समाज को आंजणा, जाट, चौधरी, पटेल, या कलबी जैसे नामों से भी जाना जाता है.
मुख्य क्षेत्र:
यह समाज मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़) और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाया जाता है.
आजीविका:
कृषि और पशुपालन इस समाज के लोगों की आय के मुख्य स्रोत हैं.
सामाजिक सुधार:
संत श्री राजारामजी महाराज ने इस समाज में शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए.
आंजना समाज भारत के इतिहास और संस्कृति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और आधुनिक समय में भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है.

 आँजणा समाज की कुल २३२ गोत्रे हैं ।जिसमे अटीस ओड,आकोलिया, फेड़, फुवा,फांदजी, खरसान, भुतादिया, वजागांड, वागडा, फरेन, जेगोडा, मुंजी, गौज, जुआ लोह, इटार, धुजिया, केरोट, रातडा, भटौज, वगेरह समाविष्ट हैं । 
  गुजरात के कई चौधरियों के गोत्र उत्तर भारत के जाटों के समान हैं। आँजणा जाट (अंजना, चौधरी) जालौर, पाली, सिरोही, जोधपुर, बाड़मेर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ जिलों में  निवास करते हैं 
आँजणा कि उत्पति के बारे में विविध मंतव्य/दंत्तकथाये प्रचलित हैं। जैसे भाट चारण के चोपडे में आँजणा समाज के उत्पति के साथ सह्स्त्राजुन के आठ पुत्रो कि बात जुडी हुई है  । जब परशुराम शत्रुओं का संहार करने निकले तब सहस्त्रार्जुन के पास गए । युद्घ में सहस्त्रार्जुन और उनके ९२ पुत्रो की मृत्यु हो गयी ।आठ पुत्र युद्ध भूमि  छोड कर  आबू पर माँ अर्बुदा की शरण में आये ।अर्बुदा देवी ने उनकी रक्षा की ।
                                           माँ अर्बुदा देवी 

 भविष्य मे  वो कभी सशत्र धारण न करे की शर्त पर परशुराम ने उनको जीवनदान दिया ।उन आठ पुत्रो में  से दो राजस्थान गए और  भरतपुर में  राज्य की स्थापना  की | उनके वंशज जाट कहलाने लगे| 
शेष  छह पुत्र आबू में  ही रह गए वो आँजणा नाम से पहचाने गए ।
आँजणा जाट (अंजना, चौधरी) जालौर, पाली, सिरोही, जोधपुर, बाड़मेर, उदयपुर और चित्तौड़गढ़ जिलों में निवास करते  है। वे राजस्थानी की मारवाड़ी बोली बोलते हैं। मध्य प्रदेश और गुजरात में बनासकांठा, मेहसाणा, गांधीनगर, साबरकांठा में भी। अन्य उत्तर भारतीय जाट समुदाय की तरह, आँजणा चौधरी गोत्र बहिर्विवाह का पालन करते हैं।
राजस्थान में, आंजणा को दो व्यापक क्षेत्रीय प्रभागों में विभाजित किया गया है: मालवी और गुजराती। मालवी आँजणा चौधरी को आगे कई बहिर्विवाही कुलों में विभाजित किया गया है जैसे कि जेगोडा,अट्या, बाग, भूरिया, डांगी, एडिट, बकवास, गार्डिया, हुन, जुडाल, काग, कावा, खरोन, कोंडली, कुकल, कुवा, लोगरोड, मेवाड़, मुंजी, ओड।, तारक, वागडा,कुणीया, सुराणा, भोड,कातरोटिया,टांटिया,फोक,हरणी,ठांह,सिलाणा,बोका आदि 
 आंजणा राजस्थानी की मारवाडी बोली बोलते हैं।
पारंपरिक व्यवसाय खेती है, और आँजणा चौधरी मूल रूप से छोटे किसान किसानों का समुदाय है। उनकी  पारंपरिक जाति परिषद है, जो भूमि और वैवाहिक विवादों के विवादों को सुलझाती है। आँजणा हिंदू हैं, और उनके प्रमुख देवता अंजनी (अर्बुदा)माता हैं, जिनका मंदिर माउंट आबू में स्थित है।
  श्री राजाराम जी महाराज, राजस्थान में जोधपुर जिले के शिकारपुरा में स्थित आश्रम है, श्री राजाराम जी महाराज आँजणा पटेल समाज के धर्म गुरु भी है|सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम  की पुत्री अंजनाबाई ने आबू पर्वत पर अन्जनगढ़ बसाया और वहां रहनेवाले आँजणा कहलाये ।मुंबई मैं गजट के भाग १२ मैं बताये मुजब इ. स. ९५३ में भीनमाल मैं विदेशियों  का आक्रमण हुआ, तब कितने ही गुजर भीनमाल छोड़कर अन्यत्र गए । उस वक्त आँजणा पाटीदारो के लगभग २००० परिवार  भीनमाल से  निकल कर  आबू पर्वत की तलहटी में  आकर   चम्पावती नगरी में  रहने लगे । वहां से फिर धाधार मे आकर स्थापित हुए, अंत मे बनासकांठा ,साबरकांठा ,मेहसाना और गांधीनगर जिले मे फ़ैल गए| 
आँजणा समाज का इतिहास राजा महाराजाओं  के इतिहास जैसा  लिखित नहीं हैं ।धरती और माटी के साथ जुडी हुई इस जाती के बारे मैं कोई शिलालेख भी कहीं नहीं पाया जाता 
   इस समाज के लोग मुख्य रूप से राजस्थान , गुजरात,मध्य प्रदेश ( मेवाड़ एवं मारवाङ क्षेत्र ) में रहते हैं ।आँजणा समाज का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। आँजणा समाज बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है समाज के लोग सेवा क्षेत्र और व्यापार की ओर बढ रहे हैं।इस समय समाज के बहुत से लोग,महानगरों और अन्य छोटे - बड़े शहरों मे कारखानें और दुकानें चला रहे है।आँजणा समाज के बहुत से लोग सरकारी एवं निजी सेवा क्षेत्र में विभिन्न पदों पर जैसे इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, अध्यापक, प्रोफेसर और प्रशासनिक सेवाओं  में हैं।
आँजणा समाज में कई सामाजिक,धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने जन्म लिया है।अठारहवीं सदी में महान संत श्री राजाराम जी महाराज ने आँजणा समाज में जन्म लिया ।उन्होंने समाज में अन्याय ( ठाकुरों और राजाओं द्वारा ) और सामाजिक कुरितियों के खिलाफ जागरूकता पैदा की।उन्होंने समाज में शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया। आँजणा समाज में अलग अलग समय पर महान संतों एवं विचारकों ने जन्म लिया हैं।इन संतो एवं विचारकों ने देश के विभिन्न हिस्सों में कई मंदिरों एवं मठों का निर्माण  करवाया।राजस्थान में जोधपुर जिले की लूणी तहसील में शिकारपुरा नामक गाँव में एक मठ ( आश्रम )का भी निर्माण करवाया।यही आश्रम आज श्री शिकारपुरा आश्रम के नाम से प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है ।
संत श्री राजारामजी महाराज आश्रम,शिकारपुरा जोधपुर यह आश्रम राजस्थान के जोधपुर जिले के शिकारपुरा गाव में स्थित है।शिकारपुरा आश्रम लूणी से 13 किमी पर स्थित है लूणी राजस्थान के जोधपुर जिले में एक तहसील है । इस आश्रम की स्थापना उन्नीसवीं शताब्दी में संत श्री राजारामजी महाराज द्वारा की गयी थी ।

आंजना उत्पत्ति की पौराणिक कहानी 

 चौधरी समाज का इतिहास भाट की किताबों और पीढ़ियों से चली आ रही कहानियों के आधार पर लिखा गया है।  
                                          Parshuram 

परशुराम ब्राह्मण और ऋषि थे।  परशुराम ने इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय विहीन बनाया। अंत में जब उन्हें विदित हुआ कि सहस्त्रार्जुन नामक एक क्षत्रिय राजा और उनके 100 पुत्र जीवित  बचे हुए हैं  तो   परशुराम ने वहाँ पहुँच कर उसके 100 पुत्रों में से 92 को मार डाला। बचे हुए आठ बेटे युद्ध के मैदान से भाग गए और आबू पर 'मा अर्बुदा' के मंदिर के पीछे छिप गए। परशुराम वहां भी  अपना फरसा  लेकर पहुंचे  और उन्हें मारने की तैयार हुए। आठों घबरा गए और बचाने के लिए माँ  अर्बुदा से प्रार्थना की| 'माँ अर्बुदा' प्रकट हुई और परशुराम से निवेदन किया, हे ऋषिराज ये आठों अजनबी है। और उन्होंने मेरे सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इसलिए मैं उन्हें मरने नहीं दूंगी। परशुराम ने कहा कि आठ में से भविष्य में अस्सी हजार होंगे और वह मेरे खिलाफ युद्ध छेड़ेंगे? माँ  अर्बुदा  बोली , "मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि ये आठ अब अपने हाथों में  शस्त्र धारण नहीं करेंगे और आज से ये कृषि कार्य करेंगे और पृथ्वी के पुत्र बन के रहेंगे।तब परशुराम का क्रोध शांत हुआ। परशुराम के वहां से जाने पर वो आठों  बाहर आए और माँ के सामने अपने हाथ जोड़ कर खड़े हुए, और कहा, माँ आप हमारी  माँ हो।  हमें रास्ता दिखाओ।माँ ने कहा तुम अजनबी हो। आप यहाँँ कृषि काम करो। आज से लोग आपको आँजणा के रूप में पहचानेंगे।  आँजणा अब  भारत के विभिन्न राज्यों में रहने लगे हैं । खेती और पशुपालन के व्यवसाय के साथ भारत के राज्यों में फैल गए। जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, बंगाल, राजस्थान और गुजरात। आज, आँजणा भारत के लगभग नौ राज्यों में रहते हैं और उन सभी ने मिलकर अखिल आँजणा महासभा का गठन किया। इसका मुख्य कार्यालय राजस्थान के आबू में है। उन्होंने देहरादून के पास एक बड़ा शिक्षण संस्थान भी स्थापित किया है।कुछ आंजना जाट लोग अपने को हिंदू देवता हनुमान की माता अंजना से संबंधित मानते हैं[
आंजना जाति के कुछ प्रसिद्ध व्यक्ति:



  संत राजाराम जी महाराज आँजणा समाज के एक महान संत और आध्यात्मिक मार्गदर्शक माने जाते हैं। उनका जीवन समाज सेवा, भक्ति और सांस्कृतिक जागरूकता से परिपूर्ण था। वे विशेष रूप से कलबी पटेल समाज के आराध्य संत माने जाते हैं, लेकिन उनका प्रभाव आँजणा जाति सहित कई समुदायों पर पड़ा।

उनकी शिक्षाएँ समाज में एकता, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति को प्रेरित करती हैं। उन्होंने अपने जीवन में भक्ति के साथ-साथ सामाजिक सुधारों पर भी ज़ोर दिया, जिससे आँजणा समाज को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान मिली। उनके जीवन पर आधारित भजन और कथाएँ आज भी समाज में प्रेरणा का स्रोत हैं
उदयलाल आंजना:
एक भारतीय राजनीतिज्ञ, जो राजस्थान सरकार में सहकारिता मंत्री और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं,
हरीश आंजना:
उदयलाल आंजना द्वारा स्थापित हरीश आंजना फाउंडेशन के संस्थापक
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


*भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

*दामोदर दर्जी समाज महासंघ  आयोजित सामूहिक विवाह के विडिओ 

*दर्जी समाज मे मोसर (मृत्युभोज) के विडिओ 

पौराणिक कहानियाँ के विडिओ 

मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

*दर्जी  वैवाहिक  महिला संगीत के विडिओ 

*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

*भजन,कथा कीर्तन के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ  भाग 6 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 7 

*मनोरंजन,शिक्षा ,पर्यटन,उपदेश के विडिओ 

*मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ 

*जातियों के महापुरुषों की जीवनी के विडिओ 

*धार्मिक ,सामाजिक त्योहार व  जुलूस के विडिओ



25.6.24

श्री देवनारायण मंदिर देवपुरा बामनी में बेंच का इंतजाम :समाजसेवी डॉ.आलोक का दान

 श्री देवनारायण मंदिर देवपुरा बामनी   को 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट की बेंच समर्पित 



 देवपुरा बामनी गाँव मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील में स्थित है, जो मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित है। यहाँ का देवनारायण मंदिर एक अलौकिक और भव्य मंदिर है, जो पहाड़ी पर स्थित है और हरे भरे वृक्षों से घिरा हुआ है। 
DEVPURA BAMNI BO का पिन कोड 458888 है.
मंदिर की विशेषताएं:
- भगवान देवनारायण को समर्पित, जिन्हें विष्णु भगवान का अवतार माना जाता है
- पहाड़ी पर स्थित, जो आकर्षक और शांत वातावरण प्रदान करता है
- मंदिर में सुविधाएं जुटाई जा रही हैं, जिनमें सरपंच वकील सिंग जी पड़िहार का मार्गदर्शन है
देवनारायण मंदिर का महत्व:
- यहाँ आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दुखों का निवारण होता है
डॉ. दयाराम आलोक जी का दान:
- दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से 4 सिमेन्ट की बेंचें मंदिर को समर्पित की गई हैं
- यह दान मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मंदिरों में दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए सिमेन्ट बेंचें भेंट करने के अनुष्ठान के तहत किया गया है| 
 मंदिर की समिति के सदस्यों और सरपंच वकील सिंग जी ने दान दाता का सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया


समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आद्यात्मिक दान-पथ

  साहित्य मनीषी  डॉ.दयाराम जी आलोक  राजस्थान और मध्यप्रदेश के 
मंदसौर,आगर नीमच ,झालावाड़ ,रतलाम और झाबुआ जिलों के  मंदिरों ,मुक्ति धाम और  गौशालाओं में निर्माण व विकास  हेतु नकद और  आगंतुकों के बैठने  हेतु  सीमेंट की बेंचें दान देने का अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं.
 डॉ.आलोक जी  एक  सेवानिवृत्त अध्यापक हैं और वे अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने के संकल्प के साथ  आध्यात्मिक दान-पथ  पर अग्रसर हैं . 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था उन्नत करने  हेतु  सीमेंट  बेंचें और रंग रोगन के लिए नकद दान के अनुष्ठान में  आपकी वो राशि भी शामिल है जो  google कंपनी से उनके ब्लॉग  और  You tube पर विडियो से  प्राप्त होती  है| समायोजित दान राशि और सीमेंट बेंचें  पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं.

श्री देव नारायण मंदिर देवपुरा का विडिओ 


 श्री देवनारायण  मंदिर देवपुरा बामनी 
4 सिमेन्ट बेंच दान 

दान पट्टिका भेजी गई 


देवपुरा  के श्री देवनारायण मंदिर मे दानपट्टिका स्थापित 


देवनारायण मंदिर देवपुरा मे दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा भेंट बेंच का दृश्य 


श्री देवनारायण भगवान के  मंदिर मे दामोदर पथरी चिकित्सालय शामगढ़ की बेंचें  लगने का विडिओ 



श्री देवनारायण मंदिर के संरक्षक और शुभचिंतक-

वकील सिंग जी  सरपंच साब  9001526421

राजेन्द्र जी धनोतिया पत्रकार साब घसोई का सुझाव

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा
देव नारायण मंदिर देवपुरा बामणी  हेतु   4 सिमेन्ट बेंच का दान सम्पन्न  9/7/2024
 
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मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

*दर्जी समाज के मार्गदर्शक :जीवन गाथा 

*डॉ . आलोक का काव्यालोक

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*मनोरंजन,शिक्षाप्रद ,उपदेश के विडिओ 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मंदिर  कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 3 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

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श्री पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी में बेंच व्यवस्था :दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ का पावन दान

 श्री पञ्च मुखी बंजारी बालाजी धाम सुराखेड़ी  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 





समीक्षा-

 पंचमुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी, गरोठ तहसील, मंदसोर जिले में स्थित एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है।

मंदिर की विशेषताएं:

- पंचमुखी बालाजी को समर्पित
- धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध
- प्रतिवर्ष मदभागवत कथा का आयोजन
- सैंकड़ों लोग कथा श्रवण का लाभ लेते हैं
- मंदिर की लोकेशन सड़क के बिल्कुल समीप होने से दर्शनार्थियों का आवागमन बाधित नहीं होता है
- मंदिर बोलिया से 5 किलोमीटर दूरी पर शामगढ़ जाने वाली सड़क पर स्थित है

डॉ. दयाराम जी आलोक का दान:

- दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से 4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की
- मंदिर समिति के सदस्यों और लाल सिंगजी ने दान दाता का सम्मन करते हुए आभार व्यक्त किया
यह दान दर्शनार्थियों के लिए सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया है, और मंदिर की सुंदरता और महत्व को बढ़ाता है। डॉ. दयाराम जी आलोक का यह दान समाज सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्री पंचमुखी बालाजी की जय हो !

पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी का विडिओ 


मंदिर मे डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा भेंट की गई 4 बेंच दर्शाता विडिओ 




दान दाता की दान पट्टिका मंदिर की दीवार पर स्थापित की गई


 दान दाता की दान पट्टिका भेजी गई 




पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी को 
4 सिमेन्ट बेंच दान
 
पञ्चमुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी के प्रांगण  मे बेंच का दृश्य 
.9/7/2024


पञ्चमुखी बालाजी मंदिर  सुराखेड़ी का विडिओ 

पञ्च मुखी बालाजी के मंदिर के शुभचिंतक 

लाल सिंग जी अध्यक्ष  शिव सेना 9770012197 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्री पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी  हेतु 4 सिमेन्ट बेंच समर्पित  9/7/2024 
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मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

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*डॉ . आलोक का काव्यालोक

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*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ भाग 2 

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*मुक्ति धाम विकास की प्रेरक कहानियाँ भाग 3 

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23.6.24

श्री हनुमान मंदिर जूनाखेड़ा पिपल्या हमीर आगर मालवा में लगेंगी सीमेंट बैंच

 श्री हनुमान मंदिर जूनाखेड़ा पिपल्या हमीर आगर -मालवा हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 

जूनाखेड़ा  पिपल्या हमीर  का  हनुमान जी का मंदिर आगर से बडोद जाने वाले मार्ग पर स्थित है। आगर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। बनावट और स्थापत्य  मनोहारी है। रंग रोगन की तो बात ही मत पूछो । यह  मंदिर क्षेत्र की  हिन्दू आबादी की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। यहाँ अखंड रामायण का पाठ भी निरंतर होता रहता है। अमृत लाल जी व्यास टोंकड़ा  शामगढ़ आए और इस मंदिर के लिए 4 बेंच दान करने का अनुरोध किया । दामोदर पथरी चिकित्सालय की दान समिति ने प्रस्ताव स्वीकृत किया और  दान पट्टिका बनाकर  मंदिर को भेज दी गई है । मंदिर के शुभचिंतक लाल सिंग जी ने मंदिर मे दान पट्टिका स्थापित करने का स्थान का फ़ोटो भेजा। दान पट्टिका लगाने पर बेंचें भेजी जाएंगी। जय हो जूनाखेड़ा बजरंगबली!

जूनाखेड़ा हनुमान मंदिर पिपल्या हमीर का विडिओ 


पिपल्या हमीर मंदिर हेतु दान पट्टिका 
जूनाखेड़ा हनुमान मंदिर पिपल्या हमीर लालसिंग जी ने प्लेट लगाने की जगह बताई 




दान पट्टिका निर्धारित स्थान पर लगाने पर दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ की तरफ से सिमेन्ट की 4 बेंच  भेजी जाएंगी 
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पौराणिक कहानियाँ के विडिओ 

मंदिर कल्याण की  प्रेरक कहानियों के विडिओ  भाग 1 

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*मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियां के विडिओ भाग 4 

मंदिर कल्याण की प्रेरक कहानियाँ के विडिओ भाग 5 

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