नमस्कार मित्रों,
मंदसौर जिले की गरोठ तहसील का एक छोटा सा, पर आस्था से भरा गाँव है - बरडिया अमरा। गाँव के बस स्टैंड के समीप, मुख्य सड़क किनारे प्राइम लोकेशन पर स्थित है, हिंदू आस्था का पावन केंद्र - बाबा रामदेव जी का मंदिर।
सड़क से गुजरते ही इस सुहाने मंदिर में स्थापित बाबा रामदेव जी की भव्य और आकर्षक प्रतिमा बरबस ही मन को अपनी ओर खींच लेती है। यह मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों का पुराना विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक है, जिसके मुख्य पुजारी और संरक्षक हैं श्री रामनिवास जी जांगड़े और मंदिर समिति के अध्यक्ष के रूप में वे निरंतर इसकी सेवा कर रहे हैं।
मंदिर में आने वाले वृद्धजनों और भक्तों को बैठने में असुविधा होती थी। भक्तों से प्राप्त इसी सुझाव को मंदिर के शुभचिंतक श्री मनोज राठौर टेलर ने आगे बढ़ाया और बेंच व्यवस्था का अनुरोध किया।
इसी अनुरोध को सेवा का अवसर मानते हुए, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ द्वारा - साहित्य मनीषी डॉ. दयाराम जी आलोक के आदर्शों से प्रेरित उनके सुपुत्र डॉ. अनिल दामोदर ने दिनांक 3 सितंबर 2022 को मंदिर प्रांगण में भक्तों की सुविधा हेतु 5 सीमेंट बेंचें भेंट कीं।
यह छोटा सा दान नहीं, बल्कि एक बड़े संकल्प का हिस्सा है। आप सब जानते हैं कि सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि और अपने ब्लॉग-यूट्यूब से प्राप्त आय को समाज कल्याण में समर्पित करने का 'आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान' लिया है।
इस अनुष्ठान के अंतर्गत वे स्व-वित्तपोषित मॉडल पर मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर, झालावाड़, झाबुआ जैसे जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्ति धामों और गौशालाओं में बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन जैसे मूलभूत कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
इसी प्रेरणा को जीवित रखने के लिए मंदिर समिति ने दान पट्टिका भी मंदिर में स्थापित की है, ताकि -
दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना।
आइए, इस पुण्य कथा की पूरी यात्रा को शब्दों और दृश्यों के माध्यम से जानते हैं।

बाबा रामदेव मन्दिर बरडिया अमरा के प्रांगण में
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़
द्वारा बेंच व्यवस्था
बरडिया अमरा का पावन धाम, रामदेवजी का गूंजे नाम। सड़क किनारे मंदिर सुहाना, भक्तों का विश्वास पुराना।
भव्य प्रतिमा आकर्षक रूप, आस्था का है यहाँ स्वरूप। पाँच बेंचें दान स्वरूप मिलीं, सेवा की गाथा जग में खिली।
आलोक जी का संकल्प महान, समाज हित में दान अनुदान। पुजारी रामनिवास जी संग, समिति ने किया आभार प्रसंग।
श्लोक-
दान पट्टिका मंदिर में जड़ी, प्रेरणा की ज्योति सर्वत्र बढ़ी।
रामदेवस्य मंदिरं दिव्यं, बरडियायां ग्रामे स्थितम्। आलोकेन प्रदत्तं बेंचं, भक्तानां सुखवर्धनम्॥ दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना। पथरी अस्पतालात् दत्तं, समाज हिताय साधना॥
मंदसौर जिले के गरोठ तहसील गरोठ का एक गाँव है बर्डिया अमरा।
बाबा राम देव जी का मंदिर सड़क किनारे स्थित है।
रामदेवजी की प्रतिमा भव्य और आकर्षक है।
लोगों से मंदिर मे बेंच व्यवस्था के सुझाव मिले ।
डॉ . दयाराम जी आलोक ने इस मंदिर मे भक्तों के लीए 5 सिमेन्ट बेंच भेंट की हैं
हिन्दू आस्था का केंद्र है यह मंदिर।
राम निवास जी जांगड़े मंदिर के मुख्य पुजारी और संरक्षक हैं ।
समिति ने लोगों को दान के लिए प्रेरित करने के भाव से दान दाता का शिला पट्ट मंदिर मे स्थापित किया ।
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें