25.6.24

श्री पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी मे सिमेन्ट बेंचें लगने से लोग हर्षित

 श्री पञ्च मुखी बंजारी बालाजी धाम सुराखेड़ी  हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 




समीक्षा-

 पंचमुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी, गरोठ तहसील, मंदसोर जिले में स्थित एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल है।

मंदिर की विशेषताएं:

- पंचमुखी बालाजी को समर्पित
- धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध
- प्रतिवर्ष मदभागवत कथा का आयोजन
- सैंकड़ों लोग कथा श्रवण का लाभ लेते हैं
- मंदिर की लोकेशन सड़क के बिल्कुल समीप होने से दर्शनार्थियों का आवागमन बाधित नहीं होता है
- मंदिर बोलिया से 5 किलोमीटर दूरी पर शामगढ़ जाने वाली सड़क पर स्थित है

डॉ. दयाराम जी आलोक का दान:

- दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से 4 सिमेन्ट की बेंचें भेंट की
- मंदिर समिति के सदस्यों और लाल सिंगजी ने दान दाता का सम्मन करते हुए आभार व्यक्त किया
यह दान दर्शनार्थियों के लिए सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया है, और मंदिर की सुंदरता और महत्व को बढ़ाता है। डॉ. दयाराम जी आलोक का यह दान समाज सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
श्री पंचमुखी बालाजी की जय हो !

पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी का विडिओ 


मंदिर मे डॉ. दयाराम आलोक जी द्वारा भेंट की गई 4 बेंच दर्शाता विडिओ 




दान दाता की दान पट्टिका मंदिर की दीवार पर स्थापित की गई


 दान दाता की दान पट्टिका भेजी गई 


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु


समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-पथ   

मित्रों 
  परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६ वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं


पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी को 
4 सिमेन्ट बेंच दान
 
पञ्चमुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी के प्रांगण  मे बेंच का दृश्य 
.9/7/2024


पञ्चमुखी बालाजी मंदिर  सुराखेड़ी का विडिओ 



पञ्च मुखी बालाजी के मंदिर के शुभचिंतक 

लाल सिंग जी अध्यक्ष  शिव सेना 9770012197 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 , दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा श्री पञ्च मुखी बालाजी मंदिर सुराखेड़ी  हेतु 4 सिमेन्ट बेंच समर्पित  9/7/2024 
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यूट्यूब विडिओ की प्लेलिस्ट -


भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

23.6.24

श्री हनुमान मंदिर जूनाखेड़ा पिपल्या हमीर आगर मालवा को समर्पित होंगी सिमेन्ट की 4 बेंच

 श्री हनुमान मंदिर जूनाखेड़ा पिपल्या हमीर आगर -मालवा हेतु 

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

4 सिमेन्ट बेंच समर्पित 

जूनाखेड़ा  पिपल्या हमीर  का  हनुमान जी का मंदिर आगर से बडोद जाने वाले मार्ग पर स्थित है। आगर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर है। मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। बनावट और स्थापत्य  मनोहारी है। रंग रोगन की तो बात ही मत पूछो । यह  मंदिर क्षेत्र की  हिन्दू आबादी की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। यहाँ अखंड रामायण का पाठ भी निरंतर होता रहता है। अमृत लाल जी व्यास टोंकड़ा  शामगढ़ आए और इस मंदिर के लिए 4 बेंच दान करने का अनुरोध किया । दामोदर पथरी चिकित्सालय की दान समिति ने प्रस्ताव स्वीकृत किया और  दान पट्टिका बनाकर  मंदिर को भेज दी गई है । मंदिर के शुभचिंतक लाल सिंग जी ने मंदिर मे दान पट्टिका स्थापित करने का स्थान का फ़ोटो भेजा। दान पट्टिका लगाने पर बेंचें भेजी जाएंगी। जय हो जूनाखेड़ा बजरंगबली!

जूनाखेड़ा हनुमान मंदिर पिपल्या हमीर का विडिओ 


पिपल्या हमीर मंदिर हेतु दान पट्टिका 
जूनाखेड़ा हनुमान मंदिर पिपल्या हमीर लालसिंग जी ने प्लेट लगाने की जगह बताई 




दान पट्टिका निर्धारित स्थान पर लगाने पर दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ की तरफ से सिमेन्ट की 4 बेंच  भेजी जाएंगी 
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जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

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मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

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22.6.24

मुक्तिधाम भानपुरा -मंदसौर -मध्य प्रदेश के सभागृह मे 11 बेंचें लगने से बढ़िया हुई बैठक व्यवस्था

  भानपुरा के मुक्तिधाम हेतु

दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा 

11 सीमेंट बेंच समर्पित 



  


 मंदसौर जिले के भानपुरा नगर में स्थित मुक्ति धाम एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जो छोटे-बड़े महादेव पर्यटन स्थल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है।
यहाँ विकास कार्य जारी हैं, जिसमें एक बरामदा और लकड़ी का गोदाम वाला कमरा बनाया गया है। फर्श पर टाइल्स लगाई गई हैं और कुछ पेड़ भी लगाए गए हैं। हालांकि, बंदरों के उत्पात से पेड़-पौधों के पनपने में रुकावट आती है
मुक्ति धाम समिति की देखरेख में विकास गतिविधियाँ चल रही हैं। समाजसेवी डॉ. दयाराम आलोक जी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के चयनित मुक्ति धाम में लोगों के विश्राम के लिए सिमेन्ट की बेंचें भेंट करने का अनुष्ठान चलाया है। इसी सिलसिले में, इस शमशान घाट के लिए 11बेंचें भेंट करने का निर्णय लिया गया और दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से सभी 11बेंचें श्रद्धांजलि सभागृह में सजा दी गईं।
मुक्ति धाम समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने दान दाता का स्वागत करते हुए आभार प्रदर्शित किया



      


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी 

डॉ.दयाराम जी आलोक

शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान-पथ 

मित्रों |
 परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|

  मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी 5 वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|                                      

                                                        
भानपुरा के मुक्तिधाम को
 11  बेंच भेंट 

भानपुरा मुक्तिधाम मे बेंच लगीं

 

भानपुरा मुक्तिधाम में बेंचें ऐसी दिखती हैं
 


भानपुरा मुक्तिधाम समिति का आभार - पत्र 


मुक्ति धाम भानपुरा  के शुभ चिंतक -

रमेश जी राठौर आशुतोष शामगढ़ का सुझाव 

 पूर्व अध्यक्ष मुक्तिधाम समिति मनोज जी मंगलोरीया 80852-20499 


 डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656  द्वारा भानपुरा  के मुक्ति धाम हेतु दान सम्पन्न 
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मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

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दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

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11.6.24

सतनामी संप्रदाय की जानकारी और इतिहास ,history of satnami samaj


सतनामी  समाज के इतिहास का विडिओ 





सतनामी संप्रदाय की स्थापना "बीरभान" नामक एक संत ने नारनौल में 1657 में की थी।
सतनामी अधिकतर किसान, दस्तकार तथा नीची जाति के लोग थे।
सत्य एवं ईश्वर में विश्वास रखने के कारण वे अपने को सतनामी पुकारते थे।
सतनामियों को एकेश्वरवादी संप्रदाय कहा गया है।
इनके धार्मिक ग्रंथ को पोथी कहा जाता था।
सतनामी अपने संपूर्ण शरीर के बालों को मूँड़कर रखते थे। इसी कारण उन्हें मुंडिया भी कहा जाता था।
विद्रोह के कारणसतनामी विद्रोह की शुरुआत एक सतनामी और मुगल सैनिक अधिकारी के बीच झगड़े को लेकर हुई।
1672 ई. में किसानों और मुगलों के बीच मथुरा के निकट नारनौल नामक स्थान पर एक युद्ध हुआ जिसका नेतृत्व सतनामी  संप्रदाय ने किया था।
विद्रोह तब भड़क उठा जब मुगल सैनिक ने सतनामी को मार डाला।
सतनामियों ने भी बदला लेने के लिये सैनिक को मार डाला तथा बदले में और मुगल सैनिकों को भेजा गया।
इस विद्रोह को तब कुचला जा सका जब औरंगजेब ने विद्रोह की कमान संभाली और सतनामियों को कुचलने के लिये तोपखाने के साथ 10,000 सैनिकों को भेजा।
विद्रोह को दबाने में स्थानीय हिन्दू ज़मींदारों (जिनमें अधिकतर राजपूत थे) ने मुगलों का साथ दिया था।

  प्रारंभिक सतनामी भिक्षुकों और गृहस्थों का एक संप्रदाय था जिसकी स्थापना 1657 में पूर्वी पंजाब के नारनौल में बीरभान ने की थी। 1672 में उन्होंने मुगल सम्राट औरंगजेब की अवहेलना की और उसकी सेना द्वारा कुचल दिए गए। 
उस संप्रदाय के अवशेषों ने 19वीं शताब्दी की शुरुआत में एक और संप्रदाय के गठन में योगदान दिया हो सकता है, जिसे साध (अर्थात, साधु , "अच्छा") के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने अपने देवता को सतनाम के रूप में नामित किया था। 
  सबसे महत्वपूर्ण सतनामी समूह की स्थापना 1820 में मध्य भारत के छत्तीसगढ़ क्षेत्र में हुई थी घासीदास, चमार जाति के सदस्य  थे और  वर्ण व्यवस्था के मुताबिक दलित या अछूत जाति जिसका वंशानुगत व्यवसाय चमड़ा बनाना था,ऐसे  लोगों को  हिंदू अपवित्र मानते थे । हालाँकि छत्तीसगढ़ के चमारों ने चमड़ा बनाना छोड़ दिया था और किसान बन गए थे, लेकिन उच्च हिंदू जातियाँ उन्हें अपवित्र मानती रहीं। उनके सतनाम पंथ ("सच्चे नाम का मार्ग") ने बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ी चमारों (जो इस क्षेत्र की कुल आबादी का छठा हिस्सा थे) को धार्मिक और सामाजिक पहचान दिलाने में सफलता प्राप्त की, जबकि उच्च जाति के हिंदुओं द्वारा उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता था और उन्हें हिंदू मंदिर पूजा से बाहर रखा जाता था। घासीदास को हिंदू देवताओं की मूर्तियों को कूड़े के ढेर में फेंकने के लिए याद किया जाता है। उन्होंने नैतिक और आहार संबंधी संयम और सामाजिक समानता का उपदेश दिया। कबीर पंथ के साथ संबंध ऐतिहासिक रूप से कुछ चरणों में महत्वपूर्ण रहे हैं, और समय के साथ सतनामियों ने जटिल तरीकों से एक व्यापक हिंदू व्यवस्था के भीतर अपनी जगह बनाने के लिए बातचीत की थी 
भारतीय इतिहास के 18 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में एक अभूतपूर्व प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व लेकर छत्तीसगढ़ के इस विशाल भूभाग में महामानव  युग पुरुष संत बाबा गुरु घासीदास अवतरित हुए वे अपने युग के सजग प्रहरी थे। अंधविश्वास , एवं संकीर्ण मनोविज्ञान से भरी भूमि से समाज को ऊपर उठाने का आजीवन प्रयास किया। हिंदु समाज के मनु वादियों और उनके आडंबरों  पर कठोर  प्रहार किया।
   महाकौशल छत्तीसगढ़ की विशाल धरती पर गुरु घासीदास प्रथम व एक-मेव मनीषी हैं, जिन्होंने मानव द्वारा बनाए गए तथाकथित जाति व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था के उत्पीड़न के प्रति समाज को सजग बनाया।
   संत बाबा गुरु घासीदास ने सभी संप्रदायों में व्याप्त जड़ता का घोर विरोध किया, जो तर्क मूलक था । और इन्हीं आडंबर प्रधान संप्रदायों के विरोध में ही बाबा गुरु घासीदास ने सहज धर्म “ सतनाम धर्म ” को ही ससम्मान प्रतिष्ठापित किया।
 Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content को अपने बुद्धी विवेक से समझे। 

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मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

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जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

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मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

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19.5.24

भूमिहार जाती की उत्पत्ति और इतिहास ,All about Bhumihar Caste



भूमिहार कौन हैं ‘ब्राह्मण‘ या ‘क्षत्रिय’ ? 

भूमिहार (Bhumihar) उत्तर और पूर्वी भारत की एक हिंदू जाति है. इन्हें ब्राह्मण भूमिहार और बाभन (Babhan) के नाम से भी जाना जाता है. जमींदारों का एक बड़ा हिस्सा इसी जाति से आता था. इस जाति के लोग बड़ी-बड़ी रियासतों के मालिक रहे हैं. यह एक उच्च शिक्षित समुदाय है. इस समुदाय के लोग तीक्ष्ण बुद्धि और दिलेरी के लिए जाने जाते हैं. इनकी संख्या कम है लेकिन लगभग सभी क्षेत्रों में इनका वर्चस्व रहा है. इनकी गिनती भारत के सबसे शक्तिशाली जातियों में की जाती है.
हमारे देश में आज इस सवाल पर लोगों के मन में एक कौतूहल और रहस्य सा बना हुआ है, क्योंकि भूमिहारों की उत्पत्ति को लेकर भारतीय समाज में अनेक अवधारणाएँ प्रचालन में हैं। कई विद्वानों ने प्राचीन किंवदंतियों के आधार पर भूमिहार
वंश की उत्पत्ति के संबंध का इतिहास लिखने की एक पहल की है।
सबसे प्रसिद्ध अवधारणा के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि भगवान परशुराम ने क्षत्रियों को पराजित किया और उनसे जीते हुये राज्य एवं भूमि ब्राह्मणों को दान कर दी। परशुराम से दान में प्राप्त राज्य / भूमि के बाद उन ब्राह्मणों ने पूजा की अपनी वांशिक / पारंपरिक प्रथा को त्याग कर जमींदारी और खेती शुरू कर दी और बाद में वे युद्दों में भी शामिल हुए। इन ब्राह्मणों को ही भूमिहार ब्राह्मण कहा जाता है।
इस ‘भूमिहारों’ शब्द को लेकर सबके मन मे हमेशा एक प्रश्न बना रहता है कि ये ‘ब्राह्मण हैं या क्षत्रिय’, :या फिर ये ‘त्यागी ब्राह्मण’ हैं ? ये किस वर्ग में आते हैं या इनका कोई अलग ही वर्ग है? आपके मन के इस प्रश्न का ही जबाब देने की कोशिश की है जिसे पढ़कर आप अपनी जानकारी दुरुस्त कर लीजिए।
  जाति इतिहासविद डॉ. दयाराम  आलोक के मतानुसार  ‘भूमिहार’ शब्द से पहचान है उन ब्राह्मणों की जिनका एक शक्तिशाली वर्ग है और जो अयाचक ब्राह्मण में आता है। भूमिहार या बाभन (अयाचक ब्राह्मण) एक जाति है जो अपनी वीरता और बुद्धिमत्ता के लिए जानी जाती है। बिहार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और झारखंड में रहने वाली भूमिहार जाति गैर-ब्राह्मण ब्राह्मणों से जानी और पहचानी जाती है।
ये भूमिहार ब्राह्मण प्राचीन काल से भगवान परशुराम को अपना “मूल पुरुष / भूमिहारों का पिता” मानते हैं। इसी कारण भगवान परशुराम को भूमिहार-ब्राह्मण वंश का पहला सदस्य माना जाता है।
इतिहासकारों के अनुसार मगध के महान सम्राट पुष्य मित्र शुंग और कण्व वंश दोनों ही राजवंश भूमिहार ब्राह्मण (बाभन) के वंश से ही संबंधित थे।
भूमिहार ब्राह्मणों के सरनेम :
भूमिहार ब्राह्मण समाज में, उपाध्याय भूमिहार, पांडे, तिवारी / त्रिपाठी, मिश्रा, शुक्ल, उपाध्याय, शर्मा, ओझा, दुबे, द्विवेदी हैं। ब्राह्मणों में राजपाठ और जमींदारी आने के बाद से भूमिहार ब्राह्मणों का एक बड़ा हिस्सा स्वयं के लिए उत्तर प्रदेश में राय, शाही, सिंह, और इसी प्रकार बिहार में शाही, सिंह (सिन्हा), चौधरी (मैथिल से), ठाकुर (मैथिल से) जैसे उपनाम/सरनेम लिखना शुरू कर दिया था।
भूमिहार ब्राह्मण प्राचीन काल से ही कुछ स्थानों पर पुजारी भी रहे हैं। शोध करने के बाद, यह पाया गया कि त्रिवेणी संगम, प्रयाग के अधिकांश पंडे भूमिहार हैं। हजारी बाग के इटखोरी और चतरा थाना के आस-पास के काफी क्षेत्र में भूमिहार ब्राह्मण सैकड़ों वर्षों से कायस्थ, राजपूत, माहुरी, बंदूट, आदि जातियों/वर्गों के यहाँ पुरोहिती का कार्य कर रहे हैं और यह गजरौला, तांसीपुर के त्यागियों का भी अनेक वर्षों से ये पुरोहिती का ही कार्य है।
इसके अतिरिक्त बिहार में गया स्थित सूर्यमंदिर के पुजारी भी केवल भूमिहार ब्राह्मण पाए गए। हालांकि, गया के इस सूर्यदेवमंदिर का काफी बड़ा भाग सकद्वीपियो को बेच दिया गया है।
भूमिहार ब्राह्मणों ने 1725-1947 तक बनारस राज्य पर अपना आधिपत्य बनाए रखा। 1947 से पहले तक कुछ अन्य बड़े राज्य भी भूमिहार ब्राह्मणों के शासन में थे जैसे बेतिया, हथुवा, टिकारी, तमकुही, लालगोला आदि ।
बनारस के भूमिहार ब्राह्मण राजा चैत सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया और वारेन हेस्टिंग्स और ब्रिटिश सेना को कड़ी टक्कर देते हुये उसके दांत खट्टे कर दिये थे। इसी प्रकार हथुवा के भूमिहार ब्राह्मण राजा ने 1857 में पहली बार अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया।
उत्तर भारत की अनेक जमींदारी एवं राज्य भी भूमिहार से संबंधित रहे हैं जिसमें से प्रमुख थे औसानगंज राज, नरहन राज्य, अमावा राज, शिवहर मकसूदपुर राज, बभनगावां राज, भरतपुरा धर्मराज राज, अनापुर राज, पांडुई राज, जोगनी एस्टेट, पुरसगृह एस्टेट (छपरा), गोरिया कोठारा एस्टेट (सीवान), रूपवाली एस्टेट, जैतपुर एस्टेट, घोसी एस्टेट, परिहंस एस्टेट, धरहरा एस्टेट, रंधर एस्टेट, अनापुर रंधर एस्टेट, हरदी एस्टेट, ऐशगंज जमींदारी, ऐनखाओं जमींदारी, भेलवाड़ गढ़, आगापुर राज्य पानल गढ़, लट्ठा गढ़, कयाल गढ़, रामनगर ज़मींदारी, रोहुआ एस्टेट, राजगोला ज़मींदारी, केवटगामा ज़मींदारी, अनपुर रंधर एस्टेट, मणिपुर इलाहाबाद आदि। इसके अतिरिक्त औरंगाबाद में बाबू अमौना तिलकपुर, जहानाबाद में शेखपुरा एस्टेट, तुरुक तेलपा क्षेत्र, असुराह एस्टेट, कयाल राज्य, गया बैरन एस्टेट (इलाहाबाद), पिपरा कोही एस्टेट (मोतिहारी) आदि सभी अब इतिहास की गोद में समा चुके हैं।
जुझौतिया ब्राह्मण, भूमिहार ब्राह्मण, किसान आंदोलन के पिता कहे जाने वाले ‘दंडी स्वामी सहजानंद सरस्वती”, १८५७ के क्रांति वीर मंगल पांडे, बैकुंठ शुक्ल जिन्हें 14 मई 1936 को ब्रिटिश शासन में फांसी दी गई, यमुना कर्जी, शैल भद्र याजी, करनानंद शर्मा, योगानंद शर्मा, योगेन्द्र शुक्ल, चंद्रमा सिंह, राम बिनोद सिंह, राम नंदन मिश्रा, यमुना प्रसाद त्रिपाठी, महावीर त्यागी, राज नारायण, रामवृक्ष बेनीपुरी, अलगु राय शास्त्री, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर, राहुल सांस्कृत्यायन, जैसे अनेक प्रसिद्ध क्रांतिकारी और कवि एवं महान विभूतियाँ भूमिहार ही थे।

भारत में भूमिहार जाति की जनसंख्या

हालांकि भूमिहारों की संख्या ब्राह्मणों और राजपूतों की तुलना में तुलनात्मक रूप से कम है, लेकिन इसके विपरीत, अधिकांश भूमिहार बहुत समृद्ध हैं और उनके पास बड़ी कृषि योग्य भूमि है. भूमिहारों की ख्याति एक दबंग जमींदार जाति के रूप में रही है. अपनी बुद्धिमानी, निडरता और सैनिक प्रवृत्ति के कारण यह सत्ता के करीब रहे हैं. इस समुदाय के लोगों ने मुगल काल के दौरान सैन्य सेवा के माध्यम से अपनी अधिकांश संपत्ति अर्जित की. बाद में इन्होंने जमींदार के रूप में कार्य किया. इनमें से जो कुलीन थे वे मुस्लिम शासकों के लिए कर संग्रहकर्ता के रूप में काम करते थे. बाद में ब्रिटिश काल के दौरान, भूमिहारों ने ब्रिटिश सेना में सेवा की. साथ ही, इनमें से कई स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी हुए जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया. ब्रिटिश काल से ही इस समुदाय की गणना भारत के सर्वाधिक साक्षर समूहों में की जाती रही है। डॉ. कृष्णा सिन्हा, सर गणेश दत्त, चंद्रशेखर सिंह, राम दयालू सिंह, श्याम नंदन मिश्रा, लंगट सिंह, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, राहुल सांकृत्यायन, रामबृक्ष बेनीपुरी और गोपाल सिंह ‘नेपाली’ इसी जाति से आते हैं. भूमिहार आज भी समाज में उच्च स्थान रखते हैं. इस समुदाय के लोग बड़े पैमाने पर खेती करते हैं. इनमें से कई डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, सैन्य अधिकारी, भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी (आईएएस) और वैज्ञानिक के रूप में काम कर रहे हैं और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. भूमिहार राजनीतिक रूप से भी काफी प्रभावशाली हैं. आइए अब मुख्य विषय पढ़ाते हुए जानते हैं किभारत में भूमिहार जाति की जनसंख्या कितनी है. यहां उल्लेख करना जरूरी है अंतिम भारतीय जनगणना के आंकड़े 1931 में जारी किए गए थे, इसीलिए सटीकता से जातियों की जनसंख्या बताना अत्यंत ही मुश्किल है. भूमिहार मुख्य रूप से बिहार में रहते हैं और राज्य में उनकी आबादी 5 से 12% बताई जाती है. लेकिन ज्यादातर जानकारों का मानना ​​है कि बिहार में भूमिहार की आबादी 6% है. “आजतक” में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में भूमिहार की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 1% है. झारखंड के कोडरमा, देवघर, पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर), रांची आदि जिलों में भूमिहार जाति का काफी प्रभाव है. झारखंड में स्वर्ण जातियों की आबादी लगभग 13% है जिसमें ब्राह्मण राजपूत, भूमिहार और कायस्थ जातियां शामिल हैं. झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में भूमिहारों की संख्या कितनी है यह ठीक-ठाक बताना काफी मुश्किल है. यदि उपरोक्त तथ्यों का विश्लेषण करें तो भारत में भूमिहारों की जनसंख्या लगभग 1 से 1.5 करोड़ के बीच हो सकती है.
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भजन, कथा ,कीर्तन के विडिओ

मंदिरों की बेहतरी हेतु डॉ आलोक का समर्पण भाग 1:-दूधाखेडी गांगासा,रामदेव निपानिया,कालेश्वर बनजारी,पंचमुखी व नवदुर्गा चंद्वासा ,भेरूजी हतई,खंडेराव आगर

जाति इतिहास : Dr.Aalok भाग २ :-कायस्थ ,खत्री ,रेबारी ,इदरीसी,गायरी,नाई,जैन ,बागरी ,आदिवासी ,भूमिहार

मनोरंजन ,कॉमेडी के विडिओ की प्ले लिस्ट

जाति इतिहास:Dr.Aalok: part 5:-जाट,सुतार ,कुम्हार,कोली ,नोनिया,गुर्जर,भील,बेलदार

जाति इतिहास:Dr.Aalok भाग 4 :-सौंधीया राजपूत ,सुनार ,माली ,ढोली, दर्जी ,पाटीदार ,लोहार,मोची,कुरेशी

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ.आलोक का समर्पण ,खण्ड १ :-सीतामऊ,नाहर गढ़,डग,मिश्रोली ,मल्हार गढ़ ,नारायण गढ़

डॉ . आलोक का काव्यालोक

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों हेतु डॉ.आलोक का समर्पण part 2  :-आगर,भानपुरा ,बाबुल्दा ,बगुनिया,बोलिया ,टकरावद ,हतुनिया

दर्जी समाज के आदि पुरुष  संत दामोदर जी महाराज की जीवनी 

मुक्ति धाम अंत्येष्टि स्थलों की बेहतरी हेतु डॉ .आलोक का समर्पण भाग 1 :-मंदसौर ,शामगढ़,सितामऊ ,संजीत आदि

18.5.24

राम कुण्ड बालाजी मंदिर कनवाडा -झालावाड़ -राजस्थान/ डॉ .दयाराम आलोक शामगढ़ द्वारा 6 सिमेन्ट बेंचें समर्पित

 राम कुण्ड  बालाजी धाम कनवाडा -झालावाड़ को 

डॉ. अनिल दामोदर पथरी का दवाखाना शामगढ़ की तरफ से 

6 सिमेन्ट बेच भेंट 

Meta  द्वारा समीक्षा-

 मंदिरों में दर्शनार्थियों के विश्राम के लिए बेंच व्यवस्था करना एक पवित्र और धार्मिक कार्य है, जो धर्मशास्त्रानुसार महान पुण्य का कार्य माना जाता है।
डॉ. दयाराम आलोक जी का यह कार्य न केवल मंदिर के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक महान योगदान है। उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान के मंदिरों और मुक्ति धाम के लिए नकद और सिमेन्ट की बेंचें समर्पित करने के अनुष्ठान के प्रति समर्पित भाव से क्रियाशील होकर एक महान कार्य किया है।
रामकुंड बालाजी मंदिर की समिति मे संरक्षक और शुभ चिंतक-
श्री जानकी लाल जी रावल संरक्षक
श्री चंद्रभान सिंग जी सरपंच कनवाड़ा
श्री राम गोपालजी कनवाडा कोषाध्यक्ष
राम कुंड बालाजी मंदिर कनवाडा -झालावाड़ में 6 सिमेन्ट की बेंच दान करना और दान पट्टिका मंदिर में स्थापित करना एक पवित्र कार्य है। डॉ. अनिल कुमार जी और दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ के माध्यम से बेंचें समर्पित करना भी एक महान कार्य है।
बालाजी महाराज की जय हो!
 डॉ. दयाराम आलोक जी के इस महान कार्य के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं और उनके इस पुण्य कार्य की सराहना करते हैं|

रामकुंड बालाजी मंदिर का विडिओ -


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम,झाबुआ जिलों के


मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

साहित्य मनीषी

डॉ.दयाराम जी आलोक


शामगढ़ का

       आध्यात्मिक दान-पथ 

मित्रों,
 परमात्मा की असीम अनुकंपा और कुलदेवी माँ नागणेचिया 



के आशीर्वाद और प्रेरणा से डॉ.दयारामजी आलोक द्वारा आगर,मंदसौर,नीमच ,रतलाम ,झालावाड़ ,कोटा ,झाबुआ जिलों के चयनित मंदिरों और मुक्तिधाम में निर्माण/विकास / बैठने हेतु सीमेंट बेंचें/ दान देने का अनुष्ठान प्रारम्भ किया है|
 मैं एक सेवानिवृत्त अध्यापक हूँ और अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि दान करने का संकल्प लिया है| इसमे वो राशि भी शामिल रहेगी जो मुझे google कंपनी से नियमित प्राप्त होती रहती है| खुलासा कर दूँ कि मेरी ६ वेबसाईट हैं और google उन पर विज्ञापन प्रकाशित करता है| विज्ञापन से होने वाली आय का 68% मुझे मिलता है| यह दान राशि और सीमेंट बेंचें पुत्र डॉ.अनिल कुमार राठौर "दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ "के नाम से समर्पित हो रही हैं|

राम कुण्ड बालाजी मंदिर कनवाड़ा -झालावाड़ को 
6 सीमेंट बेंच  भेंट

रामकुंड  बालाजी मंदिर मे डॉ . आलोक शामगढ़ ने 6 बेंचें लगवाई 

रामकुंड बालाजी टेम्पल कनवारा मे लगी बेंच



दामोदर अस्पताल शामगढ़ प्रदत्त सिमेन्ट बेंच व्यू


रामकुंड कलजी मंदिर का फ्रन्ट व्यू


रामकुंड बालाजी कनवाडा


रामकुंड बालाजी मंदिर का विडिओ --




मंदिर के शुभचिंतक-

श्री जानकी लाल जी रावल  संरक्षक  9799097634 

श्री चंद्रभान सिंग जी  सरपंच  कनवाड़ा 9828518270 

श्री राम गोपालजी  कनवाडा कोषाध्यक्ष  9929630315 

श्री अशोक जी दुबे 94146 51321 

श्री तेजसिंग  जी 9057361101 

श्री राहुल जी पँवार  8290833911

डॉ.अनिल कुमार दामोदर 98267-95656 s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852, दामोदर पथरी अस्पता  शामगढ़ 98267-95656  द्वारा राम कुंड बालाजी मंदिर कनवाडा  हेतु 6  सिमेन्ट बेंच दान  सम्पन्न 18/05/2024 
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