काव्यात्मक विवरण
सुवासरा की पावन भूमि पर, श्रीहरि गौशाला का गौरव खिला। गायों की सेवा, जल और घास की व्यवस्था, भक्ति और करुणा का संगम मिला।
अध्यक्ष भेरूसिंग जी देवड़ा ने नेतृत्व संभाला, संरक्षक प्रह्लाद जी रत्नावत ने संरक्षण का दीप जलाया। पत्रकार राजेन्द्र जी धनोतिया ने दान हेतु समाज को पुकारा, और जन-जन में सेवा का भाव जगाया।
इस पुकार पर समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने अपने आध्यात्मिक दान-पथ से चार सीमेंट बेंचें भेंट कीं। उनके पुत्र डॉ. अनिल कुमार राठौर ने भी दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ से सहयोग बढ़ाया।
समिति ने दान पट्टिका स्थापित कर दानदाताओं का सत्कार और आभार किया। गौशाला के कर्मचारी कन्हैया लाल जी ने सेवा भाव से इस कार्य को आगे बढ़ाया।
श्लोक-
सुवासरायां पवित्रायां, श्रीहरिगौशाला शुभा। भेरूसिंहाध्यक्षेन, धर्ममार्गः प्रबोधितः॥ रत्नावतः प्रह्लादेन, रक्षणं धर्मसंयुतम्। धनोतियेन राजेन्द्रेण, दानस्य प्रेरणा कृता॥ आलोकदयारामेण, बेंचदानं समर्पितम्। अनिलेन च राठौरेण, सहयोगः सदा कृतः॥ कन्हैयालालकर्मणा, सेवायाः दीप उज्ज्वलः। गौशालायाः महात्म्यं, धर्मे नित्यं प्रवर्धते॥
श्रीहरि गौशाला मेला ग्राउन्ड सुवासरा मे बैठक सुविधा हेतु
दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ द्वारा
4 सिमेन्ट की बेन समर्पित
सुवासरा की श्रीहरि गौशाला मे गौ सेवा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है|
गौशाला का माहात्म्य बहुत अधिक है और यह हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। गौशाला एक ऐसी संस्था है जहां गायों और अन्य पशुओं की देखभाल की जाती है और उन्हें सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
श्रीहरि गौशाला मे दान दाता दामोदर पथरी चिकित्सालय की दान पट्टिका स्थापित की गई
समाजसेवी
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।






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