लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। आध्यात्म,जाति इतिहास,जनरल नॉलेज : शामगढ़ के साधारण परिवार से जन्मे डॉ. दयाराम आलोक कैसे बने समाज के शिल्पकार?

25.8.26

शामगढ़ के साधारण परिवार से जन्मे डॉ. दयाराम आलोक कैसे बने समाज के शिल्पकार?




एक सुई... एक धागा... और एक साधारण दर्जी परिवार में जन्मा बच्चा---क्या आप सोच सकते हैं... कि वही बच्चा एक दिन दुनिया की सबसे बड़ी दर्जी समाज की वेबसाइट बनाएगा? जिसकी वेबसाइट के 8 लाख से ज्यादा पाठक होंगे? जिसके द्वारा खींचे गए 5000 से ज्यादा फोटो आज इंटरनेट पर दर्जी समाज की पहचान बने होंगे?
नमस्कार।
मैं हूँ डॉ. दयाराम आलोक
और आज मैं आपको सुना रहा हूँ... मेरी अपनी कहानी... सुई से शिखर तक की कहानी। ये कहानी सिर्फ मेरी नहीं है। ये कहानी है हर उस दर्जी भाई की... जिसने कभी सोचा था कि हम छोटा काम करते हैं। नहीं। हम छोटा काम नहीं करते। हम समाज को कपड़े पहनाते हैं... समाज को इज्जत पहनाते हैं।
तो अंत तक बने रहिए... क्योंकि इस वीडियो के आखिर में मैं आपको बताऊंगा... कि सिर्फ 1 महीना 8 दिन में... मंदिर का प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा आयोजन कैसे हो गया था... वो भी तब जब मेरी उम्र सिर्फ 25 साल थी।
मेरा जन्म... 11 अगस्त 1940 को हुआ था।
स्थान... शामगढ़। मध्य प्रदेश का एक छोटा सा कस्बा। शामगढ़ आज मंदसौर जिले में है।
मेरे पिताजी का नाम... श्री पूरालाल जी राठौर । माताजी का नाम... श्रीमती गंगा बाई।
हम दर्जी थे। हमारा परिवार... राठौर दर्जी परिवार। हमारा काम था... रेडीमेड वस्त्र बनाकर बेचना। आज जैसे शोरूम होते हैं, वैसा कुछ नहीं था। हाथ से सिलाई... हाथ से कटाई।
हमारे परिवार में... 6 भाई और 3 बहनें। कुल 9 भाई-बहन और माता-पिता। 11 लोगों का परिवार। आप सोच सकते हैं... आर्थिक हालात कैसे होंगे। साधारण... बहुत साधारण। कभी-कभी तो ऐसा लगता था... कि दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष है।
लेकिन मेरे पिताजी... पूरालाल जी... उन्होंने एक बात सिखाई। बेटा... काम कोई छोटा नहीं होता। सुई भी... अगर सही हाथ में हो... तो इतिहास सिल देती है।
मैंने... उसी सुई के साये में... पढ़ाई शुरू की।
हाईस्कूल की परीक्षा... मैंने प्रथम श्रेणी में पास की। उस जमाने में... 1950 के दशक में... दर्जी परिवार के बच्चे का प्रथम श्रेणी में पास होना... बहुत बड़ी बात थी। लोग कहते थे... अरे दर्जी का लड़का पढ़ेगा? लेकिन मैंने करके दिखाया।
और यहीं से मेरी जिंदगी ने पहली करवट ली।
शिक्षा से नौकरी तक
1961 में... मेरी नियुक्ति शासकीय सेवा में... अध्यापक के पद पर हुई। मैं शिक्षक बन गया। जिस घर में... कपड़े सीए जाते थे... उसी घर का लड़का... अब बच्चों को अक्षर सिखा रहा था।
शिक्षक बनने के बाद... मैंने पढ़ाई नहीं छोड़ी।
1969 में... मैंने राजनीति विज्ञान से एम.ए. किया। राजनीति शास्त्र से।
लेकिन मेरे मन में... एक और दर्द था। हमारे समाज में... बीमारी... गरीब लोग... डॉक्टर के पास नहीं जा पाते थे। तो मैंने... आयुर्वेद रत्न की उपाधि ली। होम्योपैथी पढ़ी. D I Hom London... लंदन से होम्योपैथी की उपाधि अर्जित की।
लोग मुझे मास्टर साहब कहते थे... कोई वैद्य जी कहता था... कोई कवि कहता था।
और मैं... सब सुनता था... क्योंकि मुझे लगता था... ज्ञान... जितना बाँटो... उतना बढ़ता है।
मैंने 1996 तक... 35 साल तक... शिक्षक के रूप में सेवा की। और प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुआ।
महासंघ का जन्म
अब आती है... मेरे जीवन की सबसे बड़ी घटना।
तारीख थी... 14 जून 1965।
मेरी उम्र... सिर्फ 24 साल... 25वां साल शुरू हुआ था।
मैंने देखा... हमारे दर्जी समाज में... शादियों में... मौत में... फिजूलखर्ची बहुत होती है। कर्ज ले लेकर... दिखावा किया जाता है। समाज बिखरा हुआ है। कोई संगठन नहीं।
तो मैंने सोचा... क्यों न... युवाओं को जोड़ा जाए।
और 14 जून 1965 को... शामगढ़ में... मेरे ही घर पर... यानी पूरालाल जी राठौर के निवास पर... हमने एक बैठक बुलाई।
नाम रखा... "दामोदर दर्जी युवक संघ"
उस पहली बैठक में... 134 दर्जी बंधु आए। 134... सोचिए... 1965 में... बिना मोबाइल... बिना इंटरनेट... 134 लोग एक आवाज पर आ गए।
उसी दिन... पहली कार्यकारिणी बनी।
अध्यक्ष बने... श्री रामचन्द्र जी सिसोदिया।
संचालक... की जिम्मेदारी... मुझे दी गई... श्री दयाराम जी आलोक को।
और कोषाध्यक्ष बने... श्री सीताराम जी संतोषी।
हमने सदस्यता अभियान चलाया... 50 नये पैसे... यानी आधा रुपया... में सदस्य बनाना शुरू किया। सैकड़ों सदस्य बने।
मैंने उसी साल... 1965 में ही... महासंघ का संविधान लिपिबद्ध किया। हाथ से लिखा था मैंने। बाद में... डॉ. लक्ष्मीनारायण जी अलौकिक ने उसमें संशोधन किए... और रसायन प्रेस, दिल्ली से छपवाकर... पूरे देश में प्रचारित किया।
वही छोटा सा युवक संघ... धीरे-धीरे... बढ़ते-बढ़ते... "अखिल भारतीय दामोदर दर्जी महासंघ" बन गया। जो आज पूरे भारत में... दर्जी समाज की आवाज है।
और आपको जानकर गर्व होगा... 2 अक्टूबर 2023 को... गांधी जयंती के अवसर पर... इसी महासंघ का पुनर्गठन हुआ है। यानी 58 साल बाद भी... वो बीज... जो 1965 में बोया था... आज वटवृक्ष बना हुआ है।
सामूहिक विवाह - एक क्रांति
शादियाँ... हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या थीं।
दहेज... दिखावा... कर्ज।
तो मैंने 1981 में... एक फैसला लिया
मध्य प्रदेश के रामपुरा नगर में... दर्जी समाज का पहला सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया।
1981 में... सामूहिक विवाह का नाम भी लोग नहीं जानते थे। लोगों ने कहा... ये कैसे होगा? लेकिन हमने करके दिखाया।
और एक नहीं... 2 नहीं... मैंने दर्जी कन्याओं के लिए 9 सामूहिक विवाह आयोजित किए हैं। और एक तो... निज वित्त पोषित... यानी अपने खुद के खर्चे से... निशुल्क सामूहिक विवाह।
इससे... सैकड़ों परिवार... कर्ज से बचे। बेटियों की शादी... सम्मान से हुई।
डग मंदिर का चमत्कार
अब वो कहानी... जिसका मैंने शुरू में वादा किया था।
डग... राजस्थान का एक स्थान है। वहाँ... दर्जी समाज का मंदिर है।
डग के दर्जी बंधुओं ने... मुझ पर विश्वास किया। मेरी कार्यक्षमता पर विश्वास करके... उन्होंने मंदिर के उद्यापन जैसा महत्वपूर्ण कार्य... मुझे सौंपा।
मेरी उम्र... सिर्फ 25 वर्ष।
लोगों ने कहा... इतना बड़ा काम... इतना पैसा कहाँ से आएगा?
लेकिन... प्रभु की अदृश्य अनुकंपा देखिए... सिर्फ 1 माह 8 दिन की छोटी सी अवधि में... मंदिर के उद्यापन हेतु पर्याप्त धन संग्रहित हो गया।
हमने एक-एक घर जाकर... चंदा एकत्रित किया। और सारी राशि... डग मंदिर के कोषाध्यक्ष... श्री कन्हैयालाल जी पँवार के सुपुर्द कर दी।
और 23 जून 1966 को... डग स्थित दर्जी मंदिर का उद्यापन... बड़े धूमधाम से हुआ। ये मेरे जीवन की... सबसे बड़ी सामाजिक उपलब्धियों की पहली कड़ी थी।
इसके बाद भी... मैंने मध्य प्रदेश और राजस्थान के अनेक मंदिरों और मुक्तिधाम में... लोगों की बैठक सुविधा के लिए... सैकड़ों सीमेंट की बेंचें भेंट कीं... और नकद दान भी दिया।
डिजिटल युग का दर्जी
अब आते हैं... आज के युग पर।
पिछले 20 वर्षों से... मैं एक काम कर रहा हूँ। जो शायद ही कोई करता है।
मैं... जहाँ भी सामाजिक रीति-रस्म होती है... शादी... सम्मेलन... मंदिर उद्यापन... मैं जाता हूँ... और दर्जी बंधुओं के फोटो लेता हूँ।
मेरा उद्देश्य... सिर्फ फोटो लेना नहीं है। मेरा उद्देश्य है... हमारे समाज का इतिहास बचाना।
आज... लगभग 5 हजार से ज्यादा दर्जी समाज के फोटो... इंटरनेट पर मौजूद हैं। जो मैंने अपलोड किए हैं।
और 15 हजार दर्जी बंधुओं का... एक वंशवृक्ष... Family Tree... मैंने बनाया है। पारिवारिक जानकारी संग्रहित करके। ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी... जाने... कि हम कौन हैं।
और इसी से जन्म हुआ... मेरी वेबसाइट का।
वेबसाइट का नाम है... "दर्जी समाज संदेश"
Address है... damodarjagat.blogspot.com
ये... दामोदर दर्जी समाज की सामाजिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करती है। और गर्व के साथ कहता हूँ... ये दुनिया की दर्जी समाज की सबसे बड़ी वेबसाइट है।
इसमें 500 से ज्यादा लेख हैं। और 8 लाख से अधिक पाठक... विश्वभर में फैले हुए हैं।
इसी तरह... मेरी दूसरी वेबसाइट है... healininathome.blogspot.com... जहाँ मेरे हजारों चिकित्सा लेख प्रकाशित होते हैं... और दुनिया भर में लाखों पाठक हैं। मेरे लेख... मशहूर मासिक पत्रिका कादंबिनी में भी प्रकाशित हुए हैं।
मैं कवि भी हूँ... मेरी 150 काव्य कृतियाँ प्रकाशित हुई हैं।
1996 में सेवानिवृत्ति के बाद... मैंने भाजपा की सदस्यता ली। और पार्टी में... अध्यक्ष नगर भाजपा बोलिया, जिला महामंत्री अध्यापक प्रकोष्ठ जिला मंदसौर, और सहसंयोजक जिला स्वास्थ्य प्रकोष्ठ जैसे पदों पर सेवा की।
तो ये थी... मेरी कहानी... सुई से शिखर तक।
एक दर्जी का बेटा... जो मास्टर बना... फिर समाज सेवक... फिर लेखक... और आज... 87 साल की उम्र में भी... आपके सामने... कैमरे के सामने... अपनी कहानी सुना रहा है।
क्यों?
क्योंकि मैं चाहता हूँ... कि हमारा समाज... संगठित रहे।
अगर आप इस वीडियो को यहाँ तक देख रहे हैं... तो आप भी मेरे परिवार का हिस्सा हैं।
मैं आपसे तीन निवेदन करता हूँ।
पहला... इस वीडियो को LIKE कीजिए... क्योंकि ये Like मेरे लिए नहीं... हमारे दर्जी समाज की एकता के लिए है।
दूसरा... इस वीडियो को SHARE कीजिए... हर दर्जी बंधु तक... ताकि उन्हें भी पता चले... कि हमारा इतिहास कितना गौरवशाली है।
और तीसरा... COMMENT में लिखिए... जय दामोदर... और अपना शहर का नाम... मुझे पता तो चले... कि मेरा ये संदेश... देश के किस कोने तक पहुंचा है।
और हाँ... मेरी वेबसाइट... damodarjagat.blogspot.com को जरूर देखिए... और चैनल को SUBSCRIBE करना मत भूलिए... ताकि अगली बार... जब मैं कोई नया वंशवृक्ष या नया इतिहास लेकर आऊं... तो सबसे पहले आप तक पहुंचे।
आपका अपना...
डॉ. दयाराम आलोक
शामगढ़
जय दामोदर... जय दर्जी समाज।

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