निपानिया का पावन धाम, रामदेव जी का जग में नाम। तीन बेंचें दान स्वरूप मिलीं, नकद राशि से सेवा खिली।
दामोदर अस्पताल का योगदान, भक्तों के सुख का संधान। शिलालेख मंदिर में स्थापित हुआ, समाज में प्रेरणा का दीप जला।
श्लोक -
रामदेवस्य मंदिरं दिव्यम्, निपानियायां ग्रामे स्थितम्। दामोदरात् प्रदत्तं दानं, भक्तानां सुखवर्धनम्॥ दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना। आलोककुलात् प्रदत्तं, समाज हिताय साधना॥
मंदसौर जिले का एक ग्राम है निपनिया जो शामगढ़ और मेलखेड़ा के नजदीक है
गाँव छोटा है लेकिन यहाँ का राम मंदिर अनोखा है।
बाबा रामदेव हिन्दू जन जन के आराध्य देवता माने जाते हैं
प्रांगण विशाल है और टाइल्स से सुसज्जित है।
परागण मे सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं ।
बगदीराम जी शर्मा ने इस मंदिर मे दान का सुझाव दिया
मंदिर मे दान दाता की दान पट्टिका स्थापित की गई
दामोदर अस्पताल शामगढ़ की तरफ से 3 सिमेन्ट बेंच और 1500/- नकद दान किया गया ।
मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के
मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु
समाजसेवी
डॉ.दयाराम आलोक
शामगढ़ का
आध्यात्मिक दान-अनुष्ठान
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।
श्री रामदेव मन्दिर निपानिया (शामगढ़)


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