15.5.26

मुक्तिधाम पिडावा :जहाँ रूह को मिले शांति, वहीं डॉ. आलोक ने दिया सम्मान; एक प्रेरणादायी बदलाव:Muktidham Pidawa

  झालावाड़  जिले का पिडावा  कस्बा 

मुक्तिधाम मे बेंच  व्यवस्था 

डॉ . आलोक का पावन दान 


पेंशन का पुण्य पथ, आलोक जी ने साधा,  

दान से जग में फैला, सेवा का इरादा।  


मुक्तिधाम में बेंचें, श्रद्धा से सजाईं,  

थके हुए जनों को, विश्राम की छाँव दिलाईं।  


झालावाड़ से मंदसौर तक, सेवा का विस्तार,  

गौशालाएँ, मंदिर, धाम—सबमें आलोक अपार।  


शामगढ़ का दान-पथ, प्रेरणा का दीप बने,  

समाजसेवा की गाथा, युगों तक जीवित रहे।  

श्लोक -

दानं धर्मस्य साधनं, लोकहिताय शुभं सदा।  
आलोकस्य कृपायुक्तं, पुण्यं तिष्ठतु सर्वदा॥  

मुक्तिधामे बेंचदानं, जनसेवा महोदयम्।  
श्रद्धया यः करोत्येव, स पुण्यफलमश्नुते॥  


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक



शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।


पिडावा के मुक्तिधाम हेतु 
 5  सिमेन्ट  बेंच भेंट 

मुक्तिधाम के पिलर पर नेम प्लेट लगी /19/8/2022 




pidawa muktidham video बेंच लगीं 25/9/2022
पीडावा मुक्तिधाम मे बेंच लगीं 25/9/2022



सुनील जी शर्मा अध्यापक 97851-39832  पिड़वा की पहल 

पिंकेशजी भावसार 99293-95221 पीड़ावा मुक्तिधाम अध्यक्ष हैं 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852 ,दामोदर पथरी अस्पताल 98267-95656 शामगढ़ द्वारा पिडावा के मुक्तिधाम हेतु  दान सम्पन्न 

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