कालेश्वर धाम खाईखेड़ा
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काव्यात्मक विवरण
*खाईखेड़ा ग्राम का गौरव, कालेश्वर धाम महान, सर्पदंशित जन की रक्षा, करता प्रभु भगवान। नाग देवता की प्रतिमा, मंदिर में शोभित है, आस्था का केंद्र बना, श्रद्धा से पूजित है।
शिव प्रिय नाग देवता, धरती के आधार, नाग पंचमी पर होती, पूजा अपार। सावन मास में भक्तजन, शिव‑नाग का ध्यान करें, मनोवांछित फल पाकर, जीवन में सुख भरें।
दानपथ पर अग्रसर, डॉ. दयाराम आलोक महान, पेंशन अर्पित कर रहे, जनसेवा का अभियान। डॉ. कृपाल सिंह खाईखेड़ा, मंदिर के शुभचिंतक, चरण सिंहजी चौहान, सहयोगी सत्पथिक।
श्याम सिंहजी सरपंच साब, ग्राम का नेतृत्व संभालें, जनहित के कार्यों से, गाँव को उज्ज्वल बनालें। डॉ. अनिल दामोदर का योगदान, बेंचों से सुविधा बढ़ी, आलोकित हुआ मंदिर प्रांगण, श्रद्धा की ज्योति जगी।**
📜 संस्कृत श्लोक
**ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि। तन्नो नागः प्रचोदयात्॥
ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि। तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥
दयाराम आलोकः समाजसेवा‑रतः सदा, कृपालसिंहः शुभचिन्तकः, धर्ममार्गे स्थितः।
चरणसिंहः सहयोगी, ग्रामहिते समर्पितः, श्यामसिंहः सरपंचः, जनकल्याणे प्रवर्तकः॥
अनिलदामोदरः भक्तानां, सुविधा‑दानकर्ता। कालेश्वरधामे सर्वे, पुण्यकर्मे प्रतिष्ठिताः॥**
आध्यात्मिक दान -पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।



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