कालेश्वर धाम खाईखेड़ा - आस्था, चमत्कार और सेवा का संगम - भूमिका
मालवा की पावन धरा पर, मंदसौर जिले के अंतर्गत शामगढ़ नगर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बसा है ग्राम खाईखेड़ा। इस ग्राम का गौरव है यहाँ का प्राचीन और चमत्कारी श्री कालेश्वर धाम।
जैसा कि कहा गया है -
खाईखेड़ा ग्राम का गौरव, कालेश्वर धाम महान, सर्पदंशित जन की रक्षा, करता प्रभु भगवान।
यह मंदिर केवल पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि जन-आस्था का जीवंत केंद्र बिंदु है। मंदिर की बनावट अत्यंत आकर्षक है, जिसके गर्भ में नाग देवता की मनोहारी प्रतिमा विराजित है। मान्यता है कि यहाँ सर्पदंश से पीड़ित व्यक्तियों के प्राणों की रक्षा होती है, इसीलिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहाँ शीश झुकाने आते हैं।
हिंदू धर्म में नाग देवता का विशेष स्थान है। कहा जाता है कि नाग के फन पर ही यह धरती टिकी हुई है।
ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि। तन्नो नागः प्रचोदयात्॥ ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि। तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥
सावन मास, जो भगवान शिव को अति प्रिय है, में नाग देवता की पूजा का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल पंचमी को मनाई जाने वाली नाग पंचमी पर यहाँ अपार भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि सच्चे मन से शिव-नाग का ध्यान करने से मनोवांछित फल और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
इस पावन धाम के संरक्षण और सुविधा विस्तार में ग्रामवासियों और भक्तों का निरंतर सहयोग रहा है। मंदिर के शुभचिंतक डॉ. कृपाल सिंह जी खाईखेड़ा, अध्यक्ष, चरण सिंह जी चौहान, सचिव और समिति प्रमुख एवं ग्राम के नेतृत्वकर्ता सरपंच श्री श्याम सिंह जी पडिहार के सार्थक प्रयासों से मंदिर प्रांगण निरंतर आलोकित हो रहा है।
इसी सेवा-क्रम में, गाँव के सरपंच के अनुरोध पर शामगढ़ के आध्यात्मिक दान-पथ के प्रणेता, समाजसेवी डॉ. दयाराम जी आलोक ने एक प्रेरणादायी पहल की।
डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी 5 वर्ष की संपूर्ण पेंशन राशि को समाज कल्याण में समर्पित करने का संकल्प लिया है। उनका यह दान-पथ केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं है - राजस्थान और मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, आगर, झालावाड़, रतलाम, झाबुआ आदि जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, मुक्तिधामों और गौशालाओं में वे वृद्धजनों और यात्रियों की सुविधा हेतु सीमेंट की बेंचें, रंग-रोगन जैसे मूलभूत कार्य करवा रहे हैं। यह पूर्णतः स्व-वित्तपोषित, पारदर्शी मॉडल है, जो उनकी पेंशन और उनके ब्लॉग व यूट्यूब से प्राप्त आय पर आधारित है।
इसी संकल्प के अंतर्गत, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ के माध्यम से डॉ. अनिल जी दामोदर के सहयोग से दिनांक 11/02/2024 को कालेश्वर धाम परिसर में 4 सीमेंट की बेंचों का दान सम्पन्न हुआ, जिससे अब यहाँ आने वाले भक्तों के लिए बैठक व्यवस्था सुगम और सुविधाजनक हो गई है।
दानपथ पर अग्रसर, डॉ. दयाराम आलोक महान, पेंशन अर्पित कर रहे, जनसेवा का अभियान। डॉ. अनिल दामोदर का योगदान, बेंचों से सुविधा बढ़ी, आलोकित हुआ मंदिर प्रांगण, श्रद्धा की ज्योति जगी।
प्रस्तुत ब्लॉग इस दिव्य धाम के महात्म्य, इसके चमत्कारी इतिहास और जन-सहयोग से हो रहे इसके विकास की एक विनम्र प्रस्तुति है।
कालेश्वर धाम खाईखेड़ा
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काव्यात्मक विवरण
*खाईखेड़ा ग्राम का गौरव, कालेश्वर धाम महान, सर्पदंशित जन की रक्षा, करता प्रभु भगवान। नाग देवता की प्रतिमा, मंदिर में शोभित है, आस्था का केंद्र बना, श्रद्धा से पूजित है।
शिव प्रिय नाग देवता, धरती के आधार, नाग पंचमी पर होती, पूजा अपार। सावन मास में भक्तजन, शिव‑नाग का ध्यान करें, मनोवांछित फल पाकर, जीवन में सुख भरें।
दानपथ पर अग्रसर, डॉ. दयाराम आलोक महान, पेंशन अर्पित कर रहे, जनसेवा का अभियान। डॉ. कृपाल सिंह खाईखेड़ा, मंदिर के शुभचिंतक, चरण सिंहजी चौहान, सहयोगी सत्पथिक।
श्याम सिंहजी सरपंच साब, ग्राम का नेतृत्व संभालें, जनहित के कार्यों से, गाँव को उज्ज्वल बनालें। डॉ. अनिल दामोदर का योगदान, बेंचों से सुविधा बढ़ी, आलोकित हुआ मंदिर प्रांगण, श्रद्धा की ज्योति जगी।**
📜 संस्कृत श्लोक
**ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि। तन्नो नागः प्रचोदयात्॥
ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदन्ताय धीमहि। तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥
दयाराम आलोकः समाजसेवा‑रतः सदा, कृपालसिंहः शुभचिन्तकः, धर्ममार्गे स्थितः।
चरणसिंहः सहयोगी, ग्रामहिते समर्पितः, श्यामसिंहः सरपंचः, जनकल्याणे प्रवर्तकः॥
अनिलदामोदरः भक्तानां, सुविधा‑दानकर्ता। कालेश्वरधामे सर्वे, पुण्यकर्मे प्रतिष्ठिताः॥*
आध्यात्मिक दान -पथ
डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।
व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।
स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।
निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।
पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।



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