16.5.26

हनुमान मंदिर ग्राम पिंछला :जहां होती है मुरादें पूरी वहाँ डॉ. आलोक का दिव्य योगदान :भक्तों को सुविधा सम्मान :Pinchala Hanuman Mandir

 मंदसौर जिले के अंतर्गत गाँव पिंछला 

पहाड़ी पर हनुमान जी का सुन्दर मंदिर 

संकट मोचक हनुमान मंदिर 

डॉ. आलोकजी की तरफ से बैठक व्यवस्था के लिए सिमेन्ट बेंचें और 1500/- नकद दान 

पिंछला गाँव की पावन पहाड़ी, हनुमान मंदिर की शोभा न्यारी। संकटमोचक का दिव्य धाम, भक्तों के मन में जगाता विश्वास तमाम।

डॉ. आलोक का दान अनोखा, बेंचों से मिला विश्राम सदा। १५०० नकद संग तीन बेंचें, श्रद्धा का दीप जला निरंतर।

शिलालेख में अंकित नाम, सेवा का अद्भुत यह आयाम। मंदसौर से फैली पुण्य धारा, समाजसेवा का उज्ज्वल नजारा।

श्लोक-

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा लोकहिताय च। पिंछला हनुमद् धामे, आलोकस्य कृपा सदा॥


हनुमान  मन्दिर पिंछ्ला (शामगढ़)

११५५१/- का दान (३ बेंच +१५००/- नकद)
शिलालेख लगाया गया 



मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक





शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।



मंदिर के शुभचिंतक 

बगदीराम जी शर्मा 96694-27426 मन्दिर के मुख्य पुजारी हैं 

शंकर लाल जी  90091-71616 

घनश्याम जी  परमार 97537-24369 

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