लोकसखा पर पढ़ें सटीक जाति इतिहास, पौराणिक कथाएं, मंदिर दर्शन और डॉ. आलोक द्वारा मुक्तिधाम व गौशालों को दान किए गए बेंच व नकद सहयोग की पूरी जानकारी। सनातन आध्यात्म -जाति इतिहास-दान विमर्श : मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग :जहां रूह को शांति मिले वहाँ आलोकजी का सुन्दर योगदान :दागियों को सुविधा सम्मान :Muktidham bus stand dag

20.5.26

मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग :जहां रूह को शांति मिले वहाँ आलोकजी का सुन्दर योगदान :दागियों को सुविधा सम्मान :Muktidham bus stand dag


जहाँ शांति में विलीन होता है जीवन - डग का मुक्तिधाम



भारतीय चिंतन में मृत्यु को अंत नहीं, मुक्ति का द्वार कहा गया है। और मुक्ति का यह द्वार जहाँ खुलता है, वह भूमि ही मुक्तिधाम है। वह केवल श्मशान नहीं, वह जीवन के अंतिम सत्य का साक्षी है, जहाँ शोक में भी शांति है, और विरह में भी सुकून।

ऐसा ही एक पावन, शांत और सुसज्जित धाम है - राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग नगर का बस स्टैंड स्थित मुक्तिधाम।

हरे-भरे वृक्षों की शीतल छाया, स्वच्छ परिसर और बैठने की सुव्यवस्थित सुविधा के साथ यह मुक्तिधाम आज जन-आस्था और जन-सुविधा का सुंदर संगम बन गया है। इस धाम पर स्वयं डगेश्वरी माता की कृपा और नगर के सेवाभावी संरक्षकों का आशीर्वाद है।

इस मुक्तिधाम के संरक्षण और संवर्धन में जिनका आत्मीय योगदान जुड़ा है, उनमें श्री पीयूष जी जैन - कोषाध्यक्ष, श्री अरुण जी अग्रवाल - व्यवस्थापक और श्री रोहित जी जैन - सचिव जैसे शुभचिंतकों का सेवाभाव उल्लेखनीय है।
पेंशन से परोपकार तक - एक आध्यात्मिक दान-पथ

इस मुक्तिधाम की सुविधाओं में हाल ही में एक और सेवा-दीप प्रज्वलित हुआ है, जो एक व्यापक और प्रेरणादायी संकल्प का हिस्सा है।

यह संकल्प है शामगढ़ के समाजसेवी, सेवानिवृत्त अध्यापक डॉ. दयाराम जी आलोक का 'आध्यात्मिक दान-पथ'।

डॉ. आलोक जी ने सेवानिवृत्ति के पश्चात अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण हेतु समर्पित करने का असाधारण निर्णय लिया। यह दान-पथ पूरी तरह स्व-वित्तपोषित है - उनकी पेंशन और उनके ब्लॉग व यूट्यूब चैनल से गूगल से प्राप्त आय से संचालित। तकनीक को परोपकार से जोड़ने का यह एक अनूठा उदाहरण है।

उनकी सेवा-दृष्टि सुविधा-केंद्रित है। वे समझते हैं कि मंदिर, गौशाला या मुक्तिधाम में एक वृद्ध, एक यात्री, एक दुखी परिजन को सबसे पहले चाहिए - बैठने के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और स्थायी स्थान। इसी सोच के साथ उनकी पहचान बन गई है - सीमेंट की बेंचों का दान।

उनका यह दान किसी एक नगर तक सीमित नहीं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के मंदसौर, नीमच, रतलाम, आगर-मालवा, झालावाड़ और झाबुआ जिलों के 151 से अधिक मंदिरों, गौशालाओं और मुक्तिधामों में उन्होंने बैठक व्यवस्था, रंग-रोगन और जीर्णोद्धार में सक्रिय योगदान दिया है।

इसी श्रृंखला में डग के बस स्टैंड वाले मुक्तिधाम हेतु 16,000 रुपये नकद राशि तथा 6 सीमेंट बेंचों का दान डॉ. दयाराम जी आलोक एवं सुपुत्र डॉ. अनिल कुमार दामोदर, दामोदर पथरी अस्पताल, शामगढ़ परिवार द्वारा सम्पन्न किया गया है।

वे दान को गुप्त नहीं, प्रेरक मानते हैं। इसलिए दान पट्टिका पर नाम अंकित करवाते हैं, ताकि समाज के अन्य सक्षम जन भी देखें, प्रेरणा लें और जनहित के इस यज्ञ में आहुति दें।

सच ही कहा गया है -

सच्चा दान वही कहलाए, जो जनहित में फलित हो जाए।

और इसी भाव को पुष्ट करता है यह श्लोक -

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना।
आलोकस्य करुणा ज्योति, जनहिताय समर्पिता॥

आइए, इस ब्लॉग आलेख और वीडियो श्रृंखला के माध्यम से हम डग के इस शांतिपूर्ण मुक्तिधाम के दर्शन करें, उसकी व्यवस्था को देखें और डॉ. आलोक जी के इस निस्वार्थ आध्यात्मिक दान-पथ की कथा को करीब से जानें।

डग नगर का मुक्तिधाम,

शांति, सुकून का पावन धाम।

हरे-भरे वृक्षों की छाया,

मन को देती निर्मल माया॥


डगेश्वरी माता की कृपा,

नगर में फैली शुभ तपस्या।

दान-पथ पर आलोक जी चले,

सेवा से जीवन को उजले॥


सीमेंट बेंचें, सुविधाएँ न्यारी,

जन-कल्याण की छवि है प्यारी।

पेंशन को समाज हेतु समर्पित,

मानवता का दीपक प्रज्वलित॥


मंदसौर, नीमच, रतलाम में,

दान की गूँज हर धाम में।

गौशालाएँ, मंदिर, मुक्तिधाम,

आलोक जी का अनुपम काम॥


दान पट्टिका से प्रेरणा फैली,

समाज सेवा की राह निकली।

सच्चा दान वही कहलाए,

जो जनहित में फलित हो जाए॥

श्लोक -

दानं धर्मस्य मूलं हि, सेवा जीवन शोभना।

आलोकस्य करुणा ज्योति, जनहिताय समर्पिता॥


मंदसौर,झालावाड़ ,आगर,नीमच,रतलाम जिलों के

मन्दिरों,गौशालाओं ,मुक्ति धाम हेतु

समाजसेवी

डॉ.दयाराम जी आलोक


शामगढ़ का

आध्यात्मिक दान पथ

डॉ. दयाराम जी आलोक द्वारा किए जा रहे 'आध्यात्मिक दान-पथ' के अंतर्गत उनके कार्यों और दान की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा का संकल्प: डॉ. आलोक जी एक सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद अपनी 5 वर्ष की कुल पेंशन राशि को समाज कल्याण और जन-सुविधा के कार्यों में समर्पित करने का संकल्प लिया है।

व्यापक सेवा का दायरा: उनका यह दान-पथ केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है। वे राजस्थान और मध्य प्रदेश के मंदसौर, आगर, नीमच, झालावाड़, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों के मंदिरों, मुक्ति धामों (श्मशान घाट) और गौशालाओं के विकास में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

सुविधा-केंद्रित दृष्टिकोण: वे उन मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो आम जनता और आगंतुकों के लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं। मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर सीमेंट की बेंचें दान करना ताकि वृद्धों और यात्रियों को बैठने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ स्थान मिल सके, उनके दान की एक प्रमुख विशेषता है।

स्व-वित्तपोषित मॉडल: उनका यह दान अनुष्ठान पूरी तरह से उनकी पेंशन और डिजिटल प्रयासों पर आधारित है। इसमें उनकी स्वयं की राशि के साथ-साथ वह आय भी सम्मिलित है, जो उन्हें गूगल कंपनी से उनके ब्लॉग और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त होती है। इस प्रकार, वे तकनीक का उपयोग परोपकार के लिए कर रहे हैं।

निरंतरता और व्यापक प्रभाव: उनका कार्य केवल एक-दो बार का दान नहीं है। उन्होंने अब तक 151 से अधिक संस्थानों में बैठक व्यवस्था को बेहतर बनाने और रंग-रोगन आदि के कार्यों में अपना योगदान दिया है।

पारदर्शिता और प्रेरणा: दान के प्रति समाज में जागरूकता लाने और दूसरों को प्रेरित करने के लिए, वे दान की गई वस्तुओं पर शिलालेख भी लगवाते हैं। यह कार्य न केवल दानदाता के प्रति सम्मान प्रदर्शित करता है, बल्कि अन्य सक्षम लोगों को भी जनकल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहित करता है।

 डग के बस स्टेंड स्थित मुक्तिधाम हेतु



15000 हजार  रुपये नकद + 6 सीमेंट बेन्च


मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग का विडिओ आलोक की आवाज









मुक्ति धाम बस स्टैन्ड डग का विडिओ आलोक की आवाज





डग के बस स्टैंड वाले मुक्ति धाम का विडियो आलोक की आवाज में





मुक्तिधाम के संरक्षक ,शुभचिंतक 

पीयूष जी जैन -कोषाध्यक्ष 

अरुण जी अग्रवाल  -व्यवस्थापक 

रोहित जी जैन -सचिव 

डॉ.अनिल कुमार दामोदर s/o डॉ.दयाराम जी आलोक 99265-24852,दामोदर पथरी अस्पताल शामगढ़ 98267-95656 द्वारा मुक्तिधाम बस स्टैन्ड डग हेतु 12 सिमेन्ट बेंच दान सम्पन्न

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